लेटे-लेटे मोबाइल चलाना जवानी में दे रहा बुढ़ापे का दर्द
कानपुर। अगर आप भी रोज रात को बिस्तर पर लेटने के बाद बस एक आखिरी रील... कहते-कहते दो बजा देते हैं तो सावधान हो जाइए। अंधेरे कमरे में मोबाइल की स्क्रीन चमकाना सिर्फ आपका समय बर्बाद नहीं कर रहा बल्कि आपको जवानी में ही बुढ़ापे में होने वाले दर्द दे रहा है।
लेटे-लेटे मोबाइल देखने से युवाओं में गर्दन का दर्द, जाम कंधे व सुबह उठते ही सिरदर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ इसको ‘टेक नेक सिंड्रोम’ का नाम दे रहे हैं, जो डिजिटल युग की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभरी है। इसका खुलासा एसोसिएशन ऑफ फिजीशियंस के एक हालिया सर्वे में हुआ है। डॉक्टरों की टीम ने छह महीने तक 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 5,400 युवाओं पर अध्ययन किया। इस सर्वे के जो नतीजे आए, उसने खुद डॉक्टरों को भी चिंता में डाल दिया है। 90 प्रतिशत युवा सोने से पहले रोज दो से चार घंटे मोबाइल व सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। इनमें से 80% ने गर्दन में दर्द, अकड़न, कंधों में तनाव और सिरदर्द की शिकायत की।
गर्दन पर बढ़ जाता है दबाव: मोबाइल चलाते समय गर्दन आगे झुका कर रखने से सर्वाइकल रीढ़, नसों, मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सामान्य स्थिति में सिर का भार पांच से छह किलो होता है, पर गर्दन झुकने पर यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है। इससे टेक नेक सिंड्रोम विकसित हो सकता है।
एसोसिएशन ऑफ फिजीशियंस के ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. एसके गौतम के अनुसार, टेक नेक सिंड्रोम आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप को लंबे समय तक झुककर देखने से गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में दर्द शुरू हो जाता है। समय पर ध्यान न देने पर गर्दन की गतिशीलता भी कम कर सकती है।
शरीर में ये लक्षण नजर आएं तो हो जाएं सावधान
● गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न
● कंधों और ऊपरी पीठ में तनाव
● सिरदर्द, गर्दन घुमाने में परेशानी
● हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन
● मोबाइल फोन का सीमित उपयोग
● मोबाइल या टैब की स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें
● हर 30 मिनट में ब्रेक लेना
● नियमित स्ट्रेचिंग करना
● सोने से एक घंटे पहले मोबाइल से दूरी बनाना भी लाभदायक है
मोबाइल से ब्रेक है बचाव

