डिकोडिंग के बाद हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की मदद ले सकता है यूपीपीएससी


 प्रयागराज :

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की साख को प्रभावित करने वाले पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा-2022 के हैंडराइटिंग विवाद का हल खोजने के लिए आयोग ने पूरा जोर लगा दिया है। सूचना के अधिकार के तहत अभ्यर्थी को अंग्रेजी की जो कापी दिखाई गई, वह तो आयोग के पास सुरक्षित है, मगर अभ्यर्थी का आरोप है कि इस कापी में हैंडराइटिंग बदली है। ऐसे में कापी बदलने जैसी चूक से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। हालांकि यह तभी स्पष्ट हो सकेगा, जब आयोग कोडिंग में चूक का पता लगाते हुए 18,042 उत्तर पुस्तिकाओं की डिकोडिंग के बाद वास्तविक हैंडराइटिंग वाली कापी खोज निकाले। इसके बाद हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण हो

जाएगी। पीसीएस-जे-2022 के अभ्यर्थी श्रवण कुमार ने आरोप लगाया था कि उसकी अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदली है तथा
18,042 कापियों में वास्तविक हैंडराइटिंग वाली कापी खोजना चुनौती

एक अन्य उत्तर पुस्तिका के कुछ पन्ने फाड़े गए हैं। इसकी वजह से वह मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाया।

अभ्यर्थी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद हाई कोर्ट ने याची के छह प्रश्न पत्रों की उत्तर पुस्तिकाएं कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को दिया था। आयोग ने हाई कोर्ट में पेश होकर हलफनामा दिया था कि प्रकरण सामने आने के बाद मुख्य परीक्षा में शामिल सभी 3,019 अभ्यार्थियों की 18,042 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराई जा रही है। जांच लंबित होने के कारण याची की उत्तर पुस्तिकाएं कोर्ट में प्रस्तुत कर पाना संभव नहीं है। आयोग ने हलफनामे में स्पष्ट किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं पर रोल नंबर की


जगह फर्जी मास्टर कोड अंकित ि किया जाता है। यह बेहद गोपनीय दे प्रक्रिया है और कोडिंग को डिकोड करने के बाद ही आयोग सही उत्तर ि पुस्तिका तक पहुंच सकता है। यानी कि आयोग अभ्यर्थी की सही ग उत्तर पुस्तिका तक पहुंचने के लिए डिकोडिंग कर रहा है। दूसरी तरफ स जिस अंग्रेजी की कापी की हैंडराइटिंग को अभ्यर्थी अपना नहीं मान रहा है, वह आखिर किसकी है? और अभ्यर्थी की हैंडराइटिंग वाली कापी स क्हां है? इन प्रश्नों का जवाब आयोग की जांच से पता चलेगा। मगर, यदि पीसीएस-जे जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में कोडिंग की चूक से कापी बदलने का प्रकरण सामने क आया तो यह आयोग की साख ज और गोपनीयता दोनों को प्रभावित क करेगा। फिलहाल आयोग डिकोडिंग के इस अत्यंत गोपनीय कार्य को नि विश्वस्त और सीमित कर्मचारियों प की मदद से कर रहा है। मूल कापी तक पहुंचने में आयोग को उस कड़ी का पता लगाना होगा, जहां यह चूक हुई है।