लखनऊ। अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों का फोन न उठाए जाने का मुद्दा विधान सभा में उठाने के बाद संवाद सेतु बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रदेश के तीन जिलों हरदोई, कन्नौज व गाजियाबाद में इसे बना दिया गया है। जनप्रतिनिधियों का फोन न उठा पाने की स्थिति में अधिकारी इस सेतु के माध्यम से 10 मिनट में जवाब देंगे। जनप्रतिनिधि का फोन न उठा पाने की स्थिति में तत्काल संवाद सेतु कमांड सेंटर से संपर्क करेगा। वहां से अधिकारी के पास फोन जाएगा और उसे 10 मिनट में फोन कर बात करना होगा।
पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर बुधवार को तीन जिलों में इसकी शुरुआत की गई। राजधानी के भागीदारी भवन में आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग से समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने तीन जिलों में संवाद सेतु व्यवस्था का शुभारंभ किया।
जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद को अधिक सुगम, पारदर्शी व समयबद्ध बनाया जाएगा। तीनों जिलों में संवाद सेतु के तहत जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर तैयार किया गया है। यहां स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। सीयूजी नंबर अपडेट कर कॉल मानीटरिंग प्रणाली को सक्रिय कर दिया गया है। सभी अधिकारियों को कमांड सेंटर से निर्देश मिलने पर 10 मिनट के अंदर कॉल रिसीव या कॉल बैक करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
मंत्री असीम अरूण ने कार्यक्रम में कहा कि पक्ष, विपक्ष व निर्दलीय सभी विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को यह सेवा एक समान रूप से दी जाएगी। प्रतिदिन आए फोन कॉल की समीक्षा की जाएगी और उसका डाटा तैयार किया जाएगा। यह व्यवस्था केवल कार्य दिवसों, कार्यालय समय में अधिकारियों को मिले सरकारी सीयूजी नंबरों पर लागू की जाएगी। आगे चरणबद्ध ढंग से सभी जिलों में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।

