लखनऊ: शिक्षक पात्रता परीक्षा
(टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश सहित देश भर के शिक्षकों ने टीचर्स फेडरेशन आफ इंडिया के नेतृत्व में दिल्ली में रैली कर विरोध जताया। वहीं अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने 13 अप्रैल को सभी राज्यों में मशाल जुलूस निकालने की घोषणा की है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र सरकार के विद्यालयों में 23 अगस्त, 2010 तथा विभिन्न राज्यों में वर्ष 2011 से शिक्षकों की नियुक्ति में टीईटी की अर्हता अनिवार्य की गई है। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों को भी दो साल के अंदर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
शिक्षक केंद्र सरकार से कानून बनाकर अनिवार्यता से राहत दिलाने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन में फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा आदि ने सरकार से शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की। वहीं शिक्षक महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने बताया कि 13 अप्रैल को शिक्षकों द्वारा देश के सभी जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकाल कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपा जाएगा।

