05 April 2026

धीरे-धीरे निजीकरण की राह पर उच्च शिक्षा, आंकड़ों पर एक नजर


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा धीरे-धीरे निजीकरण की राह पर बढ़ती जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलेगा कि राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की तुलना में निजी महाविद्यालयों की संख्या तकरीबन 14 गुना हो गई है। वहीं राज्य विश्वविद्यालयों की तुलना में दोगुने महाविद्यालय संचालित हैं। 2018-19 सत्र से तुलना करें तो निजी महाविद्यालयों की संख्या में लगभग एक हजार का इजाफा हुआ है।



2018-19 में यूपी में 6531 निजी महाविद्यालय थे जो अब 7526 हो गए हैं। वहीं निजी विश्वविद्यालय 27 से बढ़कर 52 हो गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अफसर सकल नामांकन में वृद्धि को लेकर चिंतित हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन प्रतिशत लगभग 27 है जिसे 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य में सरकारी संस्थाओं के भरोसे सभी युवाओं को उच्च शिक्षा दिलाना संभव नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ उच्च शिक्षा में गैर सरकारी संस्थाओं की संख्या बढ़ी है। प्रदेश सरकार ने पिछले सत्र में एकसाथ 46 राजकीय महाविद्यालय खोले हैं लेकिन इसके बावजूद कुल राजकीय महाविद्यालयों की संख्या 216 ही हो सकी है। पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज के अनुसार सरकार शिक्षा में कमी नहीं होने देना चाहती। निजी महाविद्यालय और विश्वविद्यालय खुलने से शिक्षा की पूर्ति हो रही है और इसका फायदा छात्र-छात्राओं को हो रहा है।

 आंकड़ों पर एक नजर


● 24 राज्य विश्वविद्यालय


● 01 मुक्त विश्वविद्यालय


● 01 डीम्ड विश्वविद्यालय


● 52 निजी विश्वविद्यालय


● 216 राजकीय महाविद्यालय


● 330 सहायता प्राप्त महाविद्यालय


● 7526 निजी महाविद्यालय