02 May 2026

शिक्षक अधिकारों की लड़ाई: UPPSS/TFI का आंदोलन बना राष्ट्रीय अभियान, ओपन कोर्ट सुनवाई बड़ी उपलब्धि

 




लखनऊ/नई दिल्ली: शिक्षक हितों की रक्षा को लेकर UPPSS/TFI का आंदोलन पिछले कई महीनों से लगातार मजबूत होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद से संगठन ने सड़क, सदन और न्यायालय—तीनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए शिक्षकों के अधिकारों के लिए संघर्ष तेज कर दिया।

डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के बहिष्कार और “काला कानून वापस लो” जैसे नारों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। इसके बाद 7 सितंबर को प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा गया, वहीं 16 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे गए। इन आंदोलनों के प्रभाव से राज्य सरकार ने इस मामले में रिव्यू दाखिल किया।

सितंबर के अंतिम सप्ताह (26–28 सितंबर) में सांसदों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे गए और इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट में 232 शिक्षकों की ओर से रिव्यू पिटिशन भी दायर की गई। 5 अक्टूबर को नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित बैठक में “No TET before RTE Act” का नारा बुलंद किया गया, जिसने आंदोलन को राष्ट्रीय दिशा दी।

25 अक्टूबर 2025 को टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) का गठन हुआ और 21 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली की घोषणा की गई। हालांकि प्रशासनिक कारणों से अनुमति निरस्त हो गई, लेकिन संगठन ने हार नहीं मानी और दिसंबर में फिर से बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू की।

दिसंबर में संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET अनिवार्यता को अनुचित बताया। 19 दिसंबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ हुई वार्ता ने आंदोलन को और गति दी।

2026 में भी आंदोलन लगातार जारी रहा। फरवरी में जिलों और ब्लॉकों स्तर पर बैठकें, मार्च में TFI की रणनीतिक बैठक और 4 अप्रैल 2026 को रामलीला मैदान में हुई विशाल महारैली ने इस संघर्ष को नई ऊंचाई दी। इस रैली में देशभर से आए शिक्षकों की भारी भागीदारी ने सरकार और न्यायपालिका दोनों का ध्यान आकर्षित किया।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस प्रकरण की सुनवाई ओपन कोर्ट में करने का निर्णय आंदोलन की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी फैसले पर पुनः खुली अदालत में सुनवाई की अनुमति मिलना दुर्लभ होता है, जो इस संघर्ष की गंभीरता और प्रभाव को दर्शाता है।

संगठन का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं, बल्कि लाखों शिक्षकों के मान-सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। नेतृत्व का विश्वास है कि संघर्ष जारी रहेगा और अंततः जीत शिक्षक समाज की होगी।