यूजीसी इक्विटी एक्ट 2026 के खिलाफ छात्रों का आक्रोश बुधवार को फूट पड़ा। छात्र समूहों ने जुलूस निकालकर और ज्ञापन देकर अपना विरोध दर्ज किया। यूजीसी गो-बैक और यूजीसी रोलबैक के नारे लगाते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने छात्रसंघ भवन से जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाला तथा एडीएम विजय शर्मा को ज्ञापन देकर यूजीसी नए अधिनियम 2026 वापस करने की मांग की। उसके बाद इविवि के कुलसचिव को भी ज्ञापन देकर विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की गई कि नया नियम वापस करने के लिए यूजीसी को पत्र भेजा जाए।
छात्रनेता अमन मिश्रा की अगुवाई में प्रदर्शन करने वाले अनुराग मिश्रा, भावेश, ऋषभ, मयंक, विनायक, भव भारत सिंघल, सुजल सिंह और राहुल गोंड आदि ने कहा कि इस अधिनियम से सामान्य छात्रों में आक्रोश है। छात्र समुदाय में विद्वेष का माहौल उत्पन्न हो रहा है जो उचित नहीं है। वहीं दूसरी ओर छात्र अर्पित राय के नेतृत्व में छात्रों ने इविवि छात्रसंघ भवन से बालसन चौराहे तक मार्च निकाला। छात्रों ने शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन बाजपेई को ज्ञापन सौंपकर नया अधिनियम वापस करवाने की मांग की।
छात्रों का कहना है कि यह अधिनियम शैक्षणिक संस्थानों में योग्यता की बजाय केवल ‘आबादी तंत्र’ और जातिगत आधार को प्राथमिकता देता दिख रहा है, जिससे प्रतिभा का पलायन होगा। अधिनियम के कुछ कड़े और एकतरफा प्रावधानों के कारण विश्वविद्यालयों में निर्दोष छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायतों और मानसिक शोषण की आशंका बढ़ गई है। शिक्षण संस्थानों में समरसता की बजाए यह नियम छात्रों को समूहों में बांटने का कार्य करेगा, जो भविष्य में राष्ट्रहित में नहीं है।
नए नियम में हैं बहुत कमियां, निवारण आवश्यक : डॉ. रीता
प्रयागराज। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी नए विनियम, 2026 को लेकर उत्तर प्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा है कि इस अधिनियम को लेकर यदि कोई चिंता जता रहा है तो उसका निवारण होना चाहिए। इलाहाबाद की पूर्व सांसद डॉ. रीता जोशी ने कहा कि उन्होंने स्वयं 30 साल तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाया है। इस मसले पर एक शिक्षक के रूप में प्रतिक्रिता देते हुए कहा कि यूजीसी का मुख्य कार्य है कि ऐसा वातावरण तैयार करे जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों सहज महसूस करें, वहां पर शोध और शिक्षा का काम हो। ये जो यूजीसी अधिनियम बना है इसमें बहुत सारी कमियां हैं। शिक्षक वर्ग की जो चिंताएं हैं उसका निवारण करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने साफ किया है मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करती है। भ्रम दूर करने और शिक्षकों से बात करने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में संतों ने चेताया नए नियम वापस लें, नहीं तो करेंगे आंदोलन
प्रयागराज। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियम के विरोध में बुधवार को माघ मेला क्षेत्र के रामानुज नगर में संत सम्मेलन हुआ। इस दौरान संतों ने इसे प्रताड़ित करने वाला नियम बताया। अन्नपूर्णा मार्ग स्थित श्रीवेदांत देशिक चैरिटेबल ट्रस्ट, सुल्तानपुर व देशिक सुधा के शिविर में हुए संत सम्मेलन में बड़ी संख्या में वैष्णव संत जुटे। सम्मेलन की अध्यक्षता पुरानी लंका से आए जगद्गुरु रामानुजाचार्य रोहिणीश्वर प्रपन्नाचार्य ने की। उन्होंने कहा कि इस नियम से शैक्षणिक संस्थानों में तनाव बढ़ेगा। जगद्गुरु रामानुजाचार्य मधुसूदनाचार्य ने कहा कि यह ‘काला कानून’ है जो सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों को प्रताड़ित करने का औजार बन सकता है। संतों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इन नियमों को वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय श्रीरामानुज वैष्णव समिति आचार्यबाड़ा के राष्ट्रीय महामंत्री जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने किया।
‘नया नियम विद्यार्थियों का भविष्य कर देगा बर्बाद’
प्रयागराज। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ संतों में भी आक्रोश है। दंडी संन्यासियों ने बुधवार को माघ मेला क्षेत्र में रैली निकालकर इसका विरोध किया और गंगा पूजन कर सरकार से अपील की है कि सरकार इस नए नियम को वापस लिया जाए। अगर नया नियम वापस नहीं हुआ तो बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। जगद्गुरु शांडिल्य की अगुवाई में कई दंडी संन्यासी दंडीबाड़ा से निकले। इस दौरान पांटून पुल से संत गंगा तट पहुंचे और गंगा पूजन कर इस कानून को वापस लेने की मांग रखी। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था ‘हमारे बच्चों को छोड़ दो’। इस कानून के लागू होने से बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। डॉ. शिव प्रसाद मिश्र ने बताया कि यह कानून बहुत ही गलत है। इसे वापस ही लेना होगा।

