कैशलेस इलाज की सुविधा से जुड़ा शिक्षा क्षेत्र का एक बड़ा वर्ग कैबिनेट निर्णय की परिधि से अछूता रह गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि बीते पांच सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा में इस वर्ग को भी प्रमुखता से शामिल किया गया था।
कैबिनेट की बैठक में हुए निर्णय में इस वर्ग का कहीं भी कोई जिक्र नहीं होने से नाराज़गी है। इसमें उच्च शिक्षा से जुड़े अशासकीय एडेड डिग्री कालेजों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों के साथ-साथ स्ववित्त पोषित डिग्री कालेजों के शिक्षक के अलावा अल्प मानदेय वाले कस्तूरबा के चपरासी, चौकीदार एवं रसोइये शामिल हैं। कैबिनेट ने बेसिक से लेकर माध्यमिक तक के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को यह सुविधा प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति तो दी लेकिन उच्च शिक्षा के अनुदानित और स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों को शामिल नहीं किया गया। वित्तपोषित एवं एडेड डिग्री कालेजों के शिक्षकों का कहना है कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की कमी के चलते निजी स्रोतों से रखे गए शिक्षक और शिक्षिकाएं शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उन्हें भी इस योजना में सम्मिलित करनाजरूरी है। उत्तर प्रदेश अवकाश प्राप्त माध्यमिक शिक्षक कल्याण एसोसिएशन ने सेवानिवृत शिक्षकों की वेदना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री से रिटायर्ड शिक्षकों के लिए भी कैशलेस चिकित्सा की सुविधा दिलाए जाने का अनुरोध किया है।
इन संगठनों ने शासन को भेजा पत्र
उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान तथा लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय के अलावा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) के महामंत्री लालमणि द्विवेदी के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शिक्षक-शिक्षणेत्तर यूनियन आल इन्डिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल कुमार बंसल ने शासन को पत्र भेजकर छूटे कर्मियों को भी इस योजना से जोड़ने की अपील की है।

