आंकड़ों पर एक नजर
● 18 मार्च से 250 केंद्रों पर शुरू होगा मूल्यांकन।
● हाईस्कूल में 4300 अंकेक्षक, 8550 डीएचई व 83800 परीक्षक।
● इंटर में 2590 अंकेक्षक, 5300 डीएचई व 48990 परीक्षक।
प्रयागराज, मुख्य संवाददाता। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की पूरी गंभीरता से त्रिस्तरीय जांच की जाएगी। यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों की अंकेक्षण में ड्यूटी लगाई है ताकि किसी प्रकार की लापरवाही न रह जाए। बोर्ड की कॉपियों का पहले परीक्षक मूल्यांकन करते हैं और उसके बाद उप मुख्य नियंत्रक या डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) रैंडम 45 या 50 कॉपियों में से कम से कम पांच कॉपियों की जांच करते हैं कि कहीं कोई कमी तो नहीं रह गई।
तीसरे चरण में डीएचई के अधीन जांची जांची गई कुल कॉपियों में से 15 प्रतिशत की जांच अंकेक्षक करते हैं। अंकेक्षण का नियम तो है लेकिन मूल्यांकन केंद्रों पर उसका गंभीरता से पालन नहीं होता। पिछले साल तक मूल्यांकन केंद्र स्तर पर ही अंकेक्षकों की नियुक्ति कर ली जाती थी लेकिन हकीकत में खानापूरी ही होती थी। कई केंद्रों पर अनुभवहीन शिक्षकों को भी अंकेक्षण की जिम्मेदारी सौंप दी जाती थी जो परीक्षक या डीएचई की कमियां इंगित तक नहीं कर पाते थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी बोर्ड ने इस साल पहली बार अपने स्तर से अंकेक्षकों की नियुक्ति की है।
दस परीक्षक पर एक डीएचई और दो डीएचई पर एक अंकेक्षक की व्यवस्था की गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देशित किया है कि अंकेक्षक प्रतिदिन अपनी रिपोर्ट उप-नियंत्रक और जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपेंगे। अंकेक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह गया। सचिव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, जिला विद्यालय निरीक्षक और मूल्यांकन केंद्र के उपनियंत्रक (प्रधानाचार्य) को पत्र लिखा है कि कार्यभार को देखते हुए एक मूल्यांकन केन्द्र पर एक से अधिक अंकेक्षकों की तैनाती की जाएगी।

