18 March 2026

एडेड जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी

 



प्रयागराज। प्रदेश के सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की भारी कमी से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद से नई भर्तियां नहीं होने से प्रदेश के हजारों विद्यालय शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।



प्रदेश में 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल हैं। नियमानुसार इनमें 1438 प्रधानाध्यापक और 8656 सहायक अध्यापकों के पद होने चाहिए, लेकिन काफी संख्या में पद खाली पड़े हैं।


मार्च 2026 में भी काफी प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इससे यह संकट और गहरा सकता है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 तक

भर्तियां हुई थीं, लेकिन 31 अक्तूबर 2019 को भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई।


दिसंबर 2019 में लिपिक और परिचायक की भर्तियों के लिए नई नियमावली बनाई गई। साथ ही जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या 100 से कम है, वहां प्रधानाध्यापक का पद समाप्त कर केवल तीन अध्यापकों की तैनाती का प्रावधान कर दिया गया।


ऐसे विद्यालयों में न तो परिचायक और न ही लिपिक की नियुक्ति का नियम रखा गया है। मार्च 2020 में प्रधानाध्यापक और


सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए अधियाचन भेजे जाने के बाद वर्ष 2021 में प्रधानाध्यापक के 390 और सहायक अध्यापकों के 1507 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी।


निदेशालय के अनुसार, सहायक अध्यापक के 1504 और प्रधानाध्यापक के 390 पदों पर आवेदन मांगे गए थे। हालांकि पिछले वर्ष सत्यापन के दौरान सहायक अध्यापकों के 1262 और प्रधानाध्यापकों के 253 कर दिए गए।


रामकुमार भारद्वाज बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले में 19 फरवरी को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उच्चीकृत विद्यालयों का सत्यापन कराया गया। इसके बाद रिक्त पदों की संख्या और घटा दी गई। सूत्रों के अनुसार, अब भर्ती करीब 635 सहायक अध्यापक और लगभग 200 प्रधानाध्यापक पदों तक सीमित हो सकती है