02 April 2026

यूजी कॉलेज के शिक्षक नहीं करा सकेंगे पीएचडी



लखनऊ,  । लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े स्नातक पाठ्यक्रम वाले कॉलेजों के शिक्षक अब पीएचडी कराने के अर्ह नहीं माने जाएंगे। इससे राजधानी के दो कॉलेजों पर गहरा असर पड़ेगा। जिसमें कृष्णा देवी गर्ल्स और शशि भूषण कॉलेज का नाम शामिल है। यह निर्णय एलयू में बीते सप्ताह विद्या परिषद की बैठक में लिया गया।जहां संशोधित पीएचडी अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी।



एलयू से संबद्ध व सहयुक्त पीजी कॉलेजों को अब पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए कुछ आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी। ऐसे कॉलेजों में उन्हीं विषय में रिसर्च हो सकती है जिनमें पहले से स्नातक-परास्नातक कोर्स हैं। कॉलेज में कम से कम दो स्थायी शिक्षक संबंधित विषय में होना जरूरी है। इसके अलावा पुस्तकालय संसाधन और शोध सुविधाएं भी मानकों के अनुरूप हों। व्यवस्था सत्यापन विश्वविद्यालय द्वारा गठित एक समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता कुलपति या नामित प्रतिनिधि करेंगे। समिति में संबंधित विभागाध्यक्ष और दो विषय विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय का कहना है कि कुलपति ने आश्वासन दिया था कि सभी कॉलेज के शिक्षक पीएचडी कराएंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो शिक्षक धरना देने को मजबूर होंगे।


एलयू नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभाएगा


एलयू ने शैक्षणिक और शोध कार्यों को नई दिशा देते हुए कंसल्टेंसी पॉलिसी 2026 को लागू कर दिया है। नई नीति के तहत सभी विभागों के शिक्षकों को परामर्श कार्यों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इससे एलयू प्रदेश के विकास में ‘नॉलेज पार्टनर’ की भूमिका और प्रभावी ढंग से निभा सकेगा। कुलपति प्रो. जेपी सैनी का कहना है कि नई कंसल्टेंसी पॉलिसी एलयू के लिए एकेडेमिया-इंडस्ट्री इंटरफेस को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।


एमए, एमएससी समेत छह पाठ्यक्रमों के नतीजे जारी

लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षिक सत्र 2025-26 विषम सेमेस्टर परीक्षा के तहत परास्नातक स्तर के छह पाठ्यक्रमों का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि एमए दर्शनशास्त्र, कंपोजिट हिस्ट्री व वेस्टर्न हिस्ट्री के प्रथम सेमेस्टर का परीक्षाफल जारी हुआ है। विद्यार्थी एलयू की वेबसाइट पर अपने अनुक्रमांक व जन्म तिथि के जरिए देख सकते हैं।