07 April 2026

डिजिटल जनगणना होगी सबसे सटीक, बढ़-चढ़कर करें प्रतिभाग

 नई दिल्ली/नोएडा। देश में 16वीं जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं और इस बार यह पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। केंद्र सरकार ने इसे अधिक सटीक, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है।

सरकार के अनुसार, इस बार नागरिक स्वयं भी ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे डेटा संग्रहण की प्रक्रिया तेज होगी और त्रुटियों की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।


📊 50 करोड़ आबादी बढ़ने का अनुमान

विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्ष 2011 की जनगणना के बाद अब देश की आबादी में बड़ा इजाफा हुआ है। अनुमान है कि 2027 तक भारत की जनसंख्या लगभग 150 करोड़ (1.5 अरब) तक पहुंच सकती है।

इस बार जनगणना का पहला चरण मकानों की सूची तैयार करने का होगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करेगा।


💻 डिजिटल प्लेटफॉर्म से आसान होगी प्रक्रिया

सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल जनगणना के माध्यम से

  • डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड होगा
  • फर्जी या दोहराव वाली प्रविष्टियों पर रोक लगेगी
  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी

इसके अलावा, नागरिकों को स्वयं पंजीकरण (Self Enumeration) की सुविधा भी दी जाएगी।


📈 भारत की जनगणना: इतिहास पर एक नजर

  • 1881: भारत में पहली बार नियमित जनगणना शुरू हुई
  • 1931: जातिगत जनगणना का आखिरी पूर्ण रिकॉर्ड
  • 1951: आजादी के बाद पहली जनगणना
  • 2011: पिछली जनगणना, आबादी लगभग 121 करोड़
  • 2027 (संभावित): अगली डिजिटल जनगणना

🎯 सरकार की अपील: सभी नागरिक करें सहभागिता

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस डिजिटल जनगणना में सक्रिय रूप से भाग लें ताकि देश की सही जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल प्रशासनिक योजनाओं को बेहतर बनाएगी बल्कि देश के विकास की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।