शिक्षा आयोग की परीक्षाओं में मांगा रैंडमाइजेशन सीटिंग प्लान
राब्यू, जागरण, प्रयागराज: प्रतियोगियों ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की शिक्षक भर्ती एवं उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) में रैंडमाइजेशन यानी अनियमित क्रम में परीक्षार्थियों को बैठाने की प्रक्रिया लागू करने की मांग की है। कहा है कि विभिन्न विषय के अभ्यर्थियों को मिश्रित रूप से बैठाए जाने पर सामूहिक नकल पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। विज्ञापन संख्या 51 में रैंडमाइजेशन प्रक्रिया लागू नहीं किए जाने से परीक्षा की शुचिता पर प्रश्नचिह्न लगे थे। प्रतियोगियों ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को संबोधित ज्ञापन दिया है।
एडेड महाविद्यालयों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर, एडेड माध्यमिक की प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) तथा प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती-2022 की परीक्षा की तिथियां घोषित हैं। इसके अलावा यूपीटीईटी के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि इन परीक्षाओं में परीक्षा केंद्रों पर नकलरोधी सीटिंग प्लान लागू किया जाए तथा एक ही विषय के अभ्यर्थियों को एक ही कक्ष में सीमित न रखा जाए।
प्रतियोगी दिनेश यादव, सुनील कुमार, पीएस परिहार, रितेश गुप्ता आदि ने यह भी मांग की है कि यदि कोई अभ्यर्थी ओएमआर शीट में 40 प्रतिशत से कम प्रश्न हल करता है, तो उस पर कक्ष निरीक्षक द्वारा विशेष निगरानी रखी जाए। इसके अलावा त्रुटिपूर्ण और विवादित प्रश्नों से बचने के लिए अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा ही पाठ्यक्रम आधारित और त्रुटिरहित प्रश्न पत्र तैयार कराए जाएं। टीजीटी-पीजीटी-2016 और 2021 की परीक्षाओं में विवादित प्रश्नों के कारण चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई थी और कई मामले न्यायालय में लंबित रहे, जिससे भर्ती विलंबित हुई।
प्रमुख मांगें:
रैंडमाइजेशन: अभ्यर्थियों को एक ही विषय के बजाय अलग-अलग विषयों के छात्रों के साथ बैठाया जाए।
विशेष निगरानी: 40% से कम प्रश्न हल करने वालों पर पैनी नजर रखी जाए।
त्रुटिरहित प्रश्न पत्र: विवादों से बचने के लिए अनुभवी विशेषज्ञों से पेपर सेट कराया जाए।

