23 April 2026

बाल-श्रम उजागर करने वाले शिक्षक का आरोप, बीएसए कार्यालय में धमकाने का मामला, निष्पक्ष जांच की मांग

 

हरदोई: बाल-श्रम उजागर करने वाले शिक्षक का आरोप, बीएसए कार्यालय में धमकाने का मामला, निष्पक्ष जांच की मांग




  जनपद के टड़ियावाँ ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय कोटरा में मासूम बच्चों से ईंटें ढुलवाने के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। बाल-श्रम और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सहायक अध्यापक विनोद कुमार ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) पर उत्पीड़न और धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।


शिक्षक विनोद कुमार का आरोप है कि बाल-श्रम की पुष्टि होने के बावजूद मुख्य आरोपी प्रधानाध्यापक राजेश कुमार का वेतन बहाल कर दिया गया, जबकि शिकायतकर्ता होने के कारण उनका वेतन 12 मार्च से द्वेषपूर्ण तरीके से रोक दिया गया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें दबाने के उद्देश्य से की जा रही है।


विनोद कुमार के अनुसार, बुधवार को जब वे साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बीएसए कार्यालय पहुंचे, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें सस्पेंड और बर्खास्त करने की धमकियां दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।


शिक्षक ने बताया कि जब प्रधानाध्यापक द्वारा कक्षा 3, 4 और 5 के बच्चों से काम कराया जा रहा था और उनके बार-बार अनुरोध के बावजूद इसे नहीं रोका गया, तब उन्होंने साक्ष्य के रूप में वीडियो बनाया। अब विभाग उन्हीं से सवाल कर रहा है कि वीडियो क्यों बनाया गया। उनका कहना है कि क्या अपराध को उजागर करना भी अपराध हो गया है।


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित प्रधानाध्यापक पहले भी उन पर झूठे आरोप लगा चुके हैं, जिसकी जांच में वे गलत पाए गए थे। वर्तमान में भी विद्यालय का माहौल खराब करने के लिए अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं।


शिक्षक विनोद कुमार ने मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) से इस पूरे मामले की जांच जिला स्तर के बजाय किसी उच्च स्तरीय निष्पक्ष समिति से कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग की शरण लेंगे।


उन्होंने कहा कि शिक्षा के मंदिर में बच्चों से मजदूरी कराना शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन है और उन्होंने केवल अपना कर्तव्य निभाया है। साथ ही उन्होंने विभाग पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि जब स्वयं विभाग ने बाल-श्रम की पुष्टि की है, तो कार्रवाई शिकायतकर्ता पर क्यों हो रही है। शिक्षक ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि उन्हें विभागीय अधिकारियों से खतरा महसूस हो रहा है।