30 April 2026

टीईटी अनिवार्यता मामले में एमपी सरकार के द्वारा Supreme court में शानदार पक्ष रखा गया⸻

 

#एमपी_सरकार के द्वारा Supreme court में शानदार पक्ष गया⸻

🔴 1. यह केस है क्या?

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 01.09.2025 के फैसले के खिलाफ है, जो सिविल अपील नं. 1385/2025 में दिया गया था।


उस फैसले में कोर्ट ने कहा:


👉 TET (Teacher Eligibility Test) अब सेवा में कार्यरत शिक्षकों (in-service teachers) के लिए भी अनिवार्य होगा



🔴 2. सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या आदेश दिया था?


कोर्ट ने शिक्षकों को 3 कैटेगरी में बाँटा:


✅ (A) जिनकी सेवा में 5 साल से कम समय बचा है


* वे बिना TET के नौकरी जारी रख सकते हैं

* लेकिन प्रमोशन नहीं मिलेगा बिना TET



⚠️ (B) जिनकी सेवा में 5 साल से ज्यादा समय बचा है


* उन्हें 2 साल के अंदर TET पास करना होगा

* अगर पास नहीं किया:

    👉 नौकरी से हटाया जा सकता है (compulsory retirement)



⚠️ (C) नए भर्ती और प्रमोशन चाहने वाले


* उनके लिए TET पूरी तरह अनिवार्य



🔴 3. अब मध्य प्रदेश सरकार क्या कह रही है?


MP सरकार ने इस फैसले के खिलाफ Review Petition डाली है और कहा है कि:



🔵 4. सबसे बड़ा मुद्दा – “हमें सुना ही नहीं गया”


👉 MP सरकार इस केस में पार्टी ही नहीं थी

👉 इसलिए:


* कोर्ट के सामने MP के नियम, कानून और तथ्य रखे ही नहीं गए

* यह Natural Justice का उल्लंघन है


📌 यह बहुत मजबूत ग्राउंड होता है कोर्ट में



🔵 5. NCTE Notification (23.08.2010) का बड़ा पॉइंट


सरकार का सबसे ताकतवर तर्क यही है 👇


👉 NCTE (National Council for Teacher Education) ने खुद कहा था:


✔️ पहले से नियुक्त शिक्षकों को TET की जरूरत नहीं


Para 4 (सबसे महत्वपूर्ण):


* जो शिक्षक पहले से नौकरी में हैं

    👉 उन्हें TET पास करने की आवश्यकता नहीं


📌 मतलब:

➡️ TET सिर्फ नई भर्ती के लिए था

➡️ पुराने शिक्षकों के लिए नहीं



🔵 6. कोर्ट ने क्या गलती की (सरकार के अनुसार)?


सरकार का कहना है:


❌ कोर्ट ने यह नहीं देखा:


* Para 4 of NCTE Notification

* राज्य के नियम

* 2017 का संशोधन


👉 इसलिए फैसला “Incomplete Information” पर आधारित है



🔵 7. RTE Act की गलत व्याख्या


कोर्ट ने RTE Act 2009 के आधार पर फैसला दिया


लेकिन सरकार कहती है:


👉 RTE Act में कहीं नहीं लिखा कि:


* सेवारत शिक्षक को TET करना ही पड़ेगा



🔵 8. 2017 Amendment का असली उद्देश्य


सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण बात उठाई:


👉 2017 संशोधन का उद्देश्य था:


* Untrained teachers को training देना


👉 NOT:


* नई qualification (TET) लागू करना


📌 मतलब:

➡️ Training ≠ TET



🔵 9. राज्य बनाम केंद्र (Federal Structure)


👉 शिक्षा “Concurrent List” में आती है


मतलब:


* केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं


सरकार का तर्क:

👉 राज्य के कानून पहले से लागू थे

👉 केंद्र का कानून automatically override नहीं कर सकता



🔵 10. 70,000 शिक्षकों पर असर


👉 इस फैसले से:


* लगभग 70,000 शिक्षक प्रभावित


📌 प्रभाव:


* नौकरी जाने का खतरा

* प्रमोशन रुक जाएगा

* मानसिक/सामाजिक असर



🔵 11. “Error apparent on record” (कानूनी भाषा)


सरकार कहती है:


👉 फैसले में स्पष्ट गलती है क्योंकि:


* महत्वपूर्ण तथ्य कोर्ट के सामने नहीं थे

* गलत interpretation हुआ


📌 यही Review का सबसे बड़ा आधार होता है



🔵 12. कोर्ट से क्या मांग की गई है?


✅ मुख्य मांग:


1. 01.09.2025 का फैसला रिव्यू किया जाए

2. 👉 TET को सेवारत शिक्षकों पर लागू करने वाला हिस्सा हटाया जाए



✅ साथ में ये आवेदन भी:


* Review फाइल करने की अनुमति

* Certified copy से छूट

* Open court hearing

* MP को पार्टी बनाने की मांग



🔴 13.सबसे मजबूत पॉइंट्स 👇


👉 1. NCTE ने खुद छूट दी है (Para 4)

👉 2. RTE Act में कहीं भी in-service TET अनिवार्य नहीं

👉 3. MP सरकार को सुना ही नहीं गया

👉 4. 70,000 शिक्षक प्रभावित हैं

👉 5. यह निर्णय अधूरा और त्रुटिपूर्ण है



🔴 14. निष्कर्ष (सीधी भाषा में)


👉 यह रिव्यू पिटिशन कहती है:


* TET = नई भर्ती के लिए

* NOT = पुराने शिक्षकों के लिए


👉 सुप्रीम कोर्ट का फैसला:


* अधूरी जानकारी पर आधारित है

* इसलिए इसे बदलना जरूरी है।