सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास और आधुनिक सुविधाओं पर लगातार जोर दिया जा रहा है। हर वर्ष शिक्षा विभाग पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन गाजियाबाद के नगर क्षेत्र के कई सरकारी विद्यालयों की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई देती है।
जिले में 21 ऐसे विद्यालय हैं, जहां पूरे स्कूल की जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षक के कंधों पर है। इन शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ प्रशासनिक और विभागीय जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। नगर क्षेत्र में कुल 93 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 230 शिक्षक तैनात हैं। इसके बावजूद शिक्षकों की असमान तैनाती बड़ी चुनौती बनी हुई है।
चुनावी व प्रशासनिक ड्यूटी भी निभानी पड़ रही
कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक शिक्षक ही प्रधानाध्यापक, कक्षा शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका निभा रहा है। विभागीय बैठकों में शामिल होना, प्रशिक्षण लेना, विभिन्न सरकारी अभियानों को सफल बनाना, नामांकन बढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क करना, विभागीय एप पर नियमित जानकारी अपलोड करना और कई बार बीएलओ सहित अन्य चुनावी व प्रशासनिक ड्यूटी भी इन्हीं शिक्षकों को निभानी पड़ती है।

