69 हजार शिक्षक भर्ती: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बैक पेपर से बाद में बीटीसी पास करने वाले 4 शिक्षकों को राहत नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में बाद में बैक पेपर देकर बीटीसी उत्तीर्ण करने वाले चार शिक्षकों को राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि भर्ती की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य है। इसके बाद हासिल की गई योग्यता से पिछली तारीख से पात्रता पैदा नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चार सहायक अध्यापकों की याचिका खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया के 30 अप्रैल 2025 के आदेश तथा उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के 29 मई 2026 के आदेश को बरकरार रखा।
भर्ती में अंतिम तिथि तक योग्यता होना जरूरी
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सार्वजनिक भर्ती में निर्धारित योग्यता की शर्तों का पालन अनिवार्य है। केवल आवेदन स्वीकार हो जाने, प्रवेश पत्र जारी होने, परीक्षा में सफल होने या बाद में नियुक्ति मिल जाने से पात्रता की मूल कमी दूर नहीं हो सकती।
2019 की भर्ती परीक्षा में लिया था हिस्सा
याचियों ने वर्ष 2019 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। उनका कहना था कि आवेदन करते समय उन्होंने अपने अंकों की सही जानकारी दी थी। उनके आवेदन स्वीकार किए गए और प्रवेश पत्र भी जारी हुए।
परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें बलिया में नियुक्ति मिली और उन्होंने लंबे समय तक सेवा भी की। याचियों ने बाद में बैक पेपर देकर बीटीसी परीक्षा उत्तीर्ण की और उन्हें 7 अगस्त 2019 को प्रमाणपत्र जारी हुआ।
22 दिसंबर 2018 तक नहीं थी आवश्यक योग्यता
कोर्ट ने कहा कि भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 दिसंबर 2018 थी, जबकि याचियों ने बीटीसी की आवश्यक योग्यता बैक पेपर का परिणाम आने के बाद हासिल की। इसलिए अंतिम तिथि पर वे भर्ती के लिए पात्र नहीं थे।
कोर्ट ने कहा कि—
आवेदन स्वीकार होना, प्रवेश पत्र जारी होना, परीक्षा में सफल होना या बाद में नियुक्ति मिल जाना पात्रता की मूल कमी को दूर नहीं कर सकता।
लंबे समय तक नौकरी और वेतन मिलने से नहीं मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक नौकरी करने और वेतन पाने के कारण सहानुभूति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और निर्धारित योग्यता की अनिवार्यता से समझौता नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने दूसरे अभ्यर्थियों को समान आधार पर नौकरी मिलने के तर्क को भी स्वीकार नहीं किया। कहा गया कि किसी अन्य को मिली गलत राहत के आधार पर समान गलत लाभ का दावा नहीं किया जा सकता।
विभागीय अनुशासनात्मक जांच भी जरूरी नहीं
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि जब नियुक्ति की बुनियाद ही निर्धारित योग्यता के अभाव में कानूनी रूप से दोषपूर्ण हो, तो सेवा समाप्त करने के लिए अलग से विभागीय अनुशासनात्मक जांच जरूरी नहीं है।
इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चारों शिक्षकों की याचिका खारिज कर दी।
मुख्य बातें
- 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा मामला
- 4 शिक्षकों की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की
- भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य
- अंतिम तिथि के बाद मिली योग्यता से पिछली तारीख से पात्रता नहीं बनेगी
- बलिया के 4 सहायक अध्यापकों का मामला
- आवेदन की अंतिम तिथि थी 22 दिसंबर 2018
- बीटीसी प्रमाणपत्र जारी हुआ 7 अगस्त 2019
- लंबे समय तक नौकरी और वेतन मिलने से पात्रता की कमी दूर नहीं होगी

