हरदोई: गांव के एक साधारण से परिषदीय विद्यालय ने असाधारण बदलाव की कहानी लिख दी है। जहां कभी अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे थे, आज वही खुद खर्चे उठाकर बच्चों को सरकारी विद्यालय पिरोजापुर भेज रहे हैं। बेहतर पढ़ाई, समर्पित शिक्षक और नवाचार ने इस स्कूल को नई पहचान दिलाई है। आसपास के गांवों से कान्वेंट स्कूलों में बच्चों को ले जाने के लिए चलने वाली स्कूली वैन और टेंपो बंद हो गए हैं। जहां विद्यालयों में घटता नामांकन चिंता का विषय है, वहीं इस प्राथमिक विद्यालय में 230 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उपस्थिति भी 90 से 95 प्रतिशत रहती है।
अनुष्का पाल, मधु उसकी बहन परी, विश्वास सिंह और उसका भाई कारव सिंह, कीर्ति सिंह, काव्या सिंह और आर्यन सिंह, साक्षी देवी और महक ये सिर्फ कुछ नाम हैं, जो इस बदलाव की मिसाल बने हैं। ये सभी पहले मांटेसरी स्कूलों में पढ़ते थे। उनके पिता किसान हैं। बच्चों की फीस व किताबों का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं था, फिर भी वे किसी तरह पढ़ाई जारी रखे हुए थे, लेकिन जैसे ही गांव से कुछ दूरी पर स्थित प्राथमिक विद्यालय पिरोजापुर में गुणवत्तापूर्ण और कान्वेंट जैसी पढ़ाई शुरू हुई, अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूल की ओर बढ़ने लगा। इन सभी बच्चों के माता-पिता ने निजी स्कूलों से नाम कटवाकर पिरोजापुर में दाखिला करा दिया। स्थिति यह हो गई कि अभिभावकों ने खुद मिलकर तीन टेंपो की व्यवस्था कर दी। करीब 50 बच्चों को उनके अभिभावक रोजाना खुद विद्यालय छोड़ने और लेने आने लगे। यह बदलाव सिर्फ कुछ बच्चों तक सीमित नहीं है। करीब 50 से अधिक बच्चों ने निजी विद्यालय छोड़कर यहां प्रवेश लिया है। सकतपुर, सहोरा, खुमारीपुर, मझरेता, सलाहपुर, संभरपुरवा और झौनीपुरवा जैसे गांवों से बच्चे अब नियमित रूप से इस विद्यालय में आ रहे हैं। पहले जहां निजी स्कूलों की बसें गांवों तक आती थीं, अब वे पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। विद्यालय में प्रधानाध्यापक राजीव कुमार सिंह के निजी प्रयास से आदर्श बने विद्यालय की स्थिति पहले खराब थी। मात्र 100 बच्चों का नामांकन था। भवन जीर्ण शीर्ण था। अब सब बदल चुका है। शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार है। स्मार्ट क्लास, अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई, कमजोर छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं व प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन ने इस स्कूल को खास बना दिया है। शिक्षक हरिहर नारायण शुक्ला, वंदना गुप्ता, बृजेश कठेरिया, शुभकरन यादव व शिक्षामित्र सुषमा देवी टीम भावना से अध्यापन कर रहे हैं। विद्यालय को लगातार चौथी बार 'निपुण विद्यालय' का दर्जा मिल चुका है। प्रधानाध्यापक को राज्यपाल द्वारा राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
इनसेट बॉक्स:
विद्यालय गांव की शान है। यह अब पूरे क्षेत्र में ही नहीं, जिले में भी प्रसिद्ध हो चुका है। यहां की शिक्षा ऐसी है कि बच्चे कभी स्कूल जाने से मना नहीं करते। — जसवंत सिंह, प्रधान
बावन ब्लाक का प्राथमिक विद्यालय पिरोजापुर आदर्श विद्यालय है। लगातार चौथी बार विद्यालय निपुण घोषित हुआ है। हर क्षेत्र में यह विद्यालय अग्रणी है। प्रधानाध्यापक को राज्य पुरस्कार भी मिला है। — डा. अजित सिंह, बीएसए
कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर लागू है हाउस सिस्टम विद्यालय में हर माह अभिभावक-शिक्षक बैठक और मासिक परीक्षण (टेस्ट) होते हैं। 2021 से हाउस सिस्टम (सरदार पटेल, लक्ष्मीबाई और अंबेडकर) लागू किया गया है। हर शनिवार 'नो बैग डे' पर बच्चे खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। प्रधानाध्यापक का लक्ष्य इस विद्यालय को 'गुरुकुल' की तरह विकसित करना है, जहां हर बच्चे को समान अवसर मिले और उसका सर्वांगीण विकास हो सके।

