समायोजन नीति में मौलिक नियुक्ति तिथि को आधार बनाने की मांग तेज
माननीय उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में एक एप्लीकेशन करना चाहिए कि विद्यालय का कार्यभार अर्थात ठहराव के आधार वरिष्ठ घोषित करने से RTE ACT के उद्देश्य की पूर्ति खतरे में पड़ जाएगी।
ऐसे प्राथमिक विद्यालय जहां छात्र 60 या 60 से कम है और दो शिक्षक /शिक्षिका कार्यरत हैं तो वह छात्र संख्या 60 से अधिक नहीं होने देंगे क्योंकि उनके विचार में होगा कि 60 से अधिक बच्चे होने पर एक शिक्षक तो आएगा लेकिन जैसे ही छात्र संख्या 60 से कम हुई तो सबसे अंत में आने वाला सरप्लस नहीं होगा अपितु जो पहले से दो शिक्षक कार्यरत हैं उनमें से जो पहले कार्यभार ग्रहण किया है वह सरप्लस हो जाएगा।
वरिष्ठता का निर्धारण विद्यालय में कार्य कर रहे शिक्षक शिक्षिकाओं में से जो जिला स्तरीय वरिष्ठ हो उससे तय होना चाहिए।
सर्वप्रथम जिले की मौलिक नियुक्ति तिथि देखी जानी चाहिए। अंतर्जनपदीय स्थानांतरण से आए शिक्षक शिक्षिकाओं की मौलिक नियुक्ति तिथि सचिव द्वारा जारी स्थानांतरण की तिथि मानी जाएगी। अगर यह तिथि समान हो तो जिस चयन सूची से उनका चयन हुआ है उसका अंक/मेरिट देखा जाना चाहिए। यदि अलग अलग भर्ती के हों और चयन का आधार भिन्न भिन्न हो तो भर्ती की विज्ञापन तिथि देखी जानी चाहिए। यदि एक ही भर्ती के हों और चयन का आधार भी समान हो तो जन्मतिथि देखी जानी चाहिए और जन्मतिथि भी समान हो जाए तब नाम पहला अल्फाबेट देखा जाना चाहिए।
अगर माननीय उच्च न्यायालय ने अपने पिछले अंतरिम आदेश में वर्तमान स्कूल के कार्यभार की तिथि को तवज्जो दिया तो उक्त तिथि के समान होने पर मौलिक नियुक्ति की तिथि देखी जाएगी। मौलिक नियुक्ति तिथि समान होने पर तब चयन का अंक और चयन का अंक समान होने पर जन्मतिथि (या चयन का आधार अलग अलग होने पर विज्ञापन की तिथि) और जन्मतिथि समान होने पर तब नाम का पहला अल्फाबेट देखा जाना चाहिए।
पुष्कर सिंह चंदेल केस में मौलिक नियुक्ति तिथि के समान होने पर जन्मतिथि को लेने को भी माननीय उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है और सर्विस रूल 1981 के रूल 22,17,17A,18 के तहत वरिष्ठता निर्धारण का आदेश किया है। साथ ही समायोजन के दायरे में कनिष्ठ शिक्षक शिक्षिकाओं को लाने को भी अवैध ठहराया है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को विषय से मुक्त रखा गया है। उसके अलावा 100 बच्चों पर तीन विषय विशेष शिक्षक होने चाहिए।
अविचल
