तबादला प्रक्रिया में उलझे शिक्षक, आवेदन वापस लेने की बढ़ी होड़
शिक्षक-छात्र अनुपात के नियम बने परेशानी की वजह
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में इन दिनों अंतरजनपदीय तबादला प्रक्रिया जारी है, लेकिन नए नियमों के कारण कई शिक्षक असमंजस और परेशानी में हैं। सबसे अधिक प्रभावित शिक्षक दंपत्ति (पति-पत्नी दोनों शिक्षक) बताए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि कई शिक्षकों ने पहले तबादले के लिए आवेदन किया, लेकिन अब नियमों को समझने के बाद अपने आवेदन वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं।
तबादला नीति में यह प्रावधान किया गया है कि यदि पति-पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं, तो उनमें से किसी एक का स्थानांतरण किया जा सकता है। हालांकि यह स्थानांतरण शिक्षक-छात्र अनुपात (PTR) की उपलब्धता के आधार पर होगा। जहां शिक्षक-छात्र अनुपात कम होगा, वहां तबादले पर रोक लग सकती है।
शिक्षकों का कहना है कि शासनादेश में स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट थी, लेकिन विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद कई बिंदुओं को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। इसी कारण बड़ी संख्या में शिक्षक लगातार बेसिक शिक्षा निदेशालय पहुंचकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं।
वरिष्ठ शिक्षक करेंगे निदेशालय पर धरना
दूसरी ओर, वर्षों से अंतरजनपदीय तबादले का इंतजार कर रहे वरिष्ठ शिक्षकों में भी नाराजगी बढ़ रही है। वरिष्ठ शिक्षक 22 जून को बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना देने की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षक नेता राजीव गौड़ ने कहा कि प्रदेश में तबादला प्रक्रिया चल रही है, लेकिन 10 से 15 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत वरिष्ठ शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने वरिष्ठता के आधार पर तबादलों की मांग उठाई है।
विभाग का दावा—नियम पूरी तरह स्पष्ट
बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि तबादला नीति और नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं। शिक्षक-छात्र अनुपात के आधार पर ही शिक्षक दंपत्तियों के स्थानांतरण पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि तबादला प्रक्रिया के लिए सरप्लस शिक्षकों की सूची जल्द जारी की जाएगी।
तबादला प्रक्रिया को लेकर बढ़ती असमंजस और विरोध के बीच अब शिक्षकों की नजर विभाग की अगली कार्रवाई और जारी होने वाली सूची पर टिकी हुई है।

