20 June 2026

लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी, पीएनपी ने प्रमाणपत्र किए निरस्त

 

लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी, पीएनपी ने प्रमाणपत्र किए निरस्त

प्रयागराज, 20 जून 2026। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए आवश्यक डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) प्रशिक्षण के दौरान नियमित उपस्थिति अनिवार्य होती है। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी करते हुए डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण पूरा कर लिया। शिकायतों की जांच के बाद उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने ऐसे अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

शिकायतों की जांच में सामने आई अनियमितताएं

पीएनपी को विभिन्न जिलों से मिली शिकायतों की जांच तत्कालीन सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के निर्देशन में कराई गई। जांच में पाया गया कि कुछ अभ्यर्थी प्रशिक्षण अवधि के दौरान सरकारी विभागों में नियमित सेवा दे रहे थे, जबकि डीएलएड/बीटीसी पाठ्यक्रम में पूर्णकालिक उपस्थिति अनिवार्य थी।

लेखपाल रहते हुए किया बीटीसी प्रशिक्षण

जांच में एटा जिले का एक मामला सामने आया, जिसमें एक अभ्यर्थी वर्ष 2014 बैच के बीटीसी प्रशिक्षण के दौरान लेखपाल पद पर कार्यरत था। इसी प्रकार वर्ष 2013 बैच में गाजीपुर के एक अभ्यर्थी प्रशिक्षण के दौरान अनुदेशक के रूप में कार्यरत पाए गए।

इसके अलावा चंदौली के एक अभ्यर्थी ने बीटीसी बैच-2015 के दौरान चिकित्सा विभाग में डाटा ऑपरेटर के रूप में नौकरी की, जबकि कौशांबी के एक अभ्यर्थी ने पंचायत सहायक पद पर रहते हुए डीएलएड बैच-2022 का प्रशिक्षण पूरा किया।

अन्य जिलों में भी मिले मामले

पीएनपी की जांच में मेरठ और कासगंज सहित अन्य जिलों से भी ऐसे प्रकरण सामने आए हैं। शिकायतों को सही पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थियों के डीएलएड/बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए हैं। साथ ही इसकी सूचना संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को भी भेज दी गई है।

नियमित उपस्थिति है अनिवार्य

डीएलएड दो वर्षीय नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) अथवा मान्यता प्राप्त निजी प्रशिक्षण संस्थानों में नियमित उपस्थिति अनिवार्य होती है। नियमों के अनुसार प्रशिक्षण अवधि के दौरान किसी अन्य नियमित नौकरी या पूर्णकालिक कार्य के साथ पाठ्यक्रम करना मान्य नहीं है।

पीएनपी की इस कार्रवाई को शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है।