सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर बड़ा खुलासा: बच्चों का 26% समय बिना प्रभावी शिक्षण के बीत रहा, TLP सर्वे में सामने आई तस्वीर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिस (TLP) सर्वे की रिपोर्ट में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की पढ़ाई को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी स्कूलों में बच्चों का लगभग 26 प्रतिशत समय बिना प्रभावी शिक्षण के ही बीत जाता है, जिससे वास्तविक सीखने का समय काफी कम हो रहा है।
13 हजार बच्चों पर किया गया अध्ययन
सर्वे के तहत बहराइच, मिर्जापुर, रायबरेली और बरेली के 200 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 और 2 की 40 मिनट की कक्षाओं का अध्ययन किया गया। प्रत्येक तीन मिनट पर पांच-पांच बच्चों की गतिविधियों का अवलोकन करते हुए करीब 13,000 बच्चों के व्यवहार और सीखने की प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया।
किस काम में कितना समय बिताते हैं बच्चे?
रिपोर्ट के अनुसार कक्षा के दौरान बच्चों का समय इस प्रकार व्यतीत होता है—
- 23% समय ब्लैकबोर्ड, पाठ्यपुस्तक या सहपाठियों को देखकर लिखने में।
- 17% समय सामूहिक दोहराव या उत्तर देने में।
- 14% समय कक्षा कार्य और अभ्यास पुस्तिका पूरी करने में।
- 8% समय केवल शिक्षक या अन्य बच्चों को देखने-सुनने में।
- लगभग 26% समय बिना प्रभावी शिक्षण या सार्थक अधिगम गतिविधियों के बीत जाता है।
रिपोर्ट में क्या दिए गए सुझाव?
रिपोर्ट में विद्यालयों में विद्यार्थी-केंद्रित (Student-Centric) शिक्षण को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। साथ ही कहा गया है कि बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए शिक्षण पद्धति में बदलाव किया जाए।
इसके अलावा बहुस्तरीय (Multigrade) शिक्षण के लिए शिक्षकों को प्रभावी प्रशिक्षण देने की भी अनुशंसा की गई है, ताकि कक्षा का अधिक समय सीखने की गतिविधियों में लगे और विद्यार्थियों के अधिगम परिणाम बेहतर हो सकें।
सीखने की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि कक्षाओं को अधिक अधिगम-उन्मुख बनाया जाए और बच्चों की सहभागिता बढ़ाई जाए, तो सरकारी विद्यालयों में सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इसी दिशा में विभाग ने आवश्यक पहल शुरू करने की बात कही है।

