लखनऊ। यूपी में 331 अनुदानित डिग्री कॉलेजों के सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों में पढ़ा रहे शिक्षकों ने गांधी जयंती के दिन लोकतांत्रिक ढंग से अपनी मांगें उठाईं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर उन्हें पूरी करने की मांग की। शिक्षकों ने कहा कि यूजीसी के निर्देश पर इन पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेकर शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए। राजधानी स्थित इको गार्डेन पर बड़ी संख्या में पहुंचे शिक्षकों ने तिरंगे गुब्बारे उड़ाए और कैशलेस कार्ड उड़ाकर उसका बहिष्कार किया।
ये भी पढ़ें - बिग ब्रेकिंग: वरिष्ठता के आधार पर स्कूलों में प्रभारी प्रधानाध्यापकों की तैनाती शुरू ।
ये भी पढ़ें - जिले का वरिष्ठता सूची बनाने का आदेश, देखें प्रारूप
उन्होंने कहा कि बीते 25 वर्षों की दोहरी स्वावित्तपोषित व्यवस्था को समाप्त किया जाए। अनुदानित महाविद्यालय स्वावित्तपोषित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. अरुणेश अवस्थी ने कहा कि एक ही परिसर, एक ही डिग्री व्यवस्था, एक ही प्राचार्य, एक ही पाठ्यक्रम, एक ही परीक्षा व एक ही डिग्री की व्यवस्था होने के बावजूद अनुदानित महाविद्यालयों में दोहरी व्यवस्था अपनाई जा रही है। स्वावित्तपोषित पाठ्यक्रमों में करीब तीन हजार शिक्षक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन उनकी सेवा सुरक्षा व सम्मानजनक वेतन के स्थायी समाधान की ओर सरकार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही। उन्होंने इस मामले से जुड़े अधिनियम वर्ष 2006 को लेकर निदेशालय ने प्रमुख सचिव को प्रस्ताव भेजा था। यूजीसी ने भी वर्ष 2012 से वर्ष 2017 की योजना में ऐसे पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने व ऐसे पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने के निर्देश दिए हैं लेकिन शिक्षकों को न्याय नहीं मिल पा रहा है।
.jpeg)
