डुप्लीकेसी के फेर में फंसी पांच हजार बच्चों की डीबीटी:- लेकिन अब फोटो अपलोड होने पर मिलेगी रकम


ज्ञानपुर। प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक एवं कंपोजिट विद्यालय में पढ़ने वाले करीब पांच हजार से अधिक बच्चों के खाते में यूनिफार्म, बैग खरीद की धनराशि नहीं पहुंच सकी। अभिभावकों का आधार मिसमैच होने पर विभाग को दुबारा सत्यापन कराना पड़ा। इसके कारण पांच माह गुजरने के बाद भी उनके खाते में रकम नहीं पहुंच सकी। इसको लेकर अभिभावक चिंतित हैं।




जिले के 892 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में एक लाख 83 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। कोरोना संक्रमण के कारण 2021 में नामांकित प्रत्येक बच्चे को दो सेट यूनिफार्म, बैग, जूता, मोजा आदि की खरीद के लिए 1100 रुपये की दर से अभिभावकों के खाते में डीबीटी की गई। एक लाख 42 हजार बच्चों का डाटा फीट होने के बाद पांच नवंबर को खाते में रकम भेजी गई, लेकिन आधार मिसमैच सहित अन्य तकनीकी खामियों के कारण एक लाख 25 हजार अभिभावकों के खाते में ही रकम पहुंच सकी। उसके बाद सुधार होने पर दूसरे और तीसरे चरण में एक लाख 73 हजार बच्चों के खाते में डीबीटी कर दिया गया, लेकिन पोर्टल पर साफ्टवेयर ने करीब 5200 बच्चों का आधार डुप्लीकेसी यानी मिसमैच दिखाया। इसके कारण उनके अभिभावकों के खाते में डीबीटी की रकम नहीं भेजी।


शुरूआती जांच में पाया गया कि एक अभिभावक के दो से तीन बच्चे स्कूल में पढ़ते। सभी के खाते में एक ही आधार नंबर दिखने के कारण ऐसी दिक्कत सामने आई। शासन के निर्देश पर दुबारा सत्यापन किया गया। इससे एक माह तक का समय गुजर गया। सत्यापन के बाद रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन अब तक ऐसे बच्चों की डीबीटी नहीं हो सकी। नाम न छापने की शर्त पर कुछ शिक्षकों ने बताया कि अभिभावकों का आधार मिसमैच होने के कारण डीबीटी नहीं हो सकी। इसको लेकर अभिभावक स्कूल कई बार आए। प्रभारी बीएसए रमाकांत सिंह ने कहा कि सत्यापन के बाद रिपोर्ट भेज दी गई। शासन स्तर से ही धनराशि भेजनी है। इसको लेकर पत्र भी लिखा गया

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