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14 November 2024

रोक: मनमानी बुलडोजर कार्रवाई नहीं चलेगी, शीर्ष कोर्ट ने कहा, कानूनी प्रक्रिया के बिना घर गिराना सत्ता का दुरुपयोग

 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि आपराधिक मामलों में महज आरोपी होने के आधार पर किसी के घर को बुलडोजर से नहीं गिराया जा सकता है। यदि सरकार उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर किसी का घर गिराती है तो उसे सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग माना जाएगा।


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पिछले कुछ समय से बुलडोजर से न्याय देने के चलन पर रोक लगाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यपालिका न तो अपने आप जज बन सकती है और न ही किसी आरोपी को दोषी घोषित कर उसका घर गिरा सकती है। जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कारण बताओ नोटिस जारी किए बगैर किसी भी संपत्ति को ध्वस्त नहीं किया जाए। प्रभावित पक्षों को जवाब देने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना होगा।


कोर्ट ने 95 पन्नों के फैसले में कहा कि यदि सरकार इस तरह की मनमानी कार्रवाई करती है तो वह कानून को ताक पर रखकर काम करने की दोषी होगी। ऐसे में अदालत को इस तरह के कृत्य से सख्ती से निपटना होगा। यदि कार्यपालिका किसी का घर महज इस आधार पर तोड़ती है कि उस पर अपराध में शामिल होने का आरोप है, तो यह कानून के शासन के सिद्धांतों के खिलाफ है।


अधिकारियों पर मुकदमा फैसले के अनुसार यदि कोई अधिकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करके, कानून का पालन न कर किसी संपत्ति को गिराता है तो इसके लिए वह निजी तौर पर जिम्मेदार होगा। पीठ ने कहा है कि अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन होगा। किसी भी निर्देश का उल्लंघन करने पर न सिर्फ उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा होगा, बल्कि कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जाएगी।



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