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05 June 2025

स्कूलों को मिली विज्ञान किट, उपयोग से परहेज


प्रयागराज, जिले के 394 उच्च प्राथमिक और 606 कंपोजिट विद्यालयों को मिली विज्ञान किट के उपयोग से शिक्षक भी हिचकिचा रहे हैं। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के विशेषज्ञों की ओर से ‘प्रयागराज में बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान किट के उपयोग के तरीकों नवाचारों में आ रही चुनौतियों’ विषय पर 200 स्कूलों के अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। छात्र-छात्राओं की समुचित सहभागिता न होने, शिक्षकों में कम ज्ञान, हर स्कूल में विज्ञान शिक्षक के न होने, विज्ञान किट में पर्याप्त सामग्री न होने और अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता न होने के कारण भी विज्ञान के प्रायोगिक अध्ययन में अड़चन आ रही है।



उदाहरण के तौर पर विज्ञान किट में कांच की टेस्ट ट्यूब का उपयोग करने से कई शिक्षक इसलिए हिचकिचाते मिले की टूटने पर अपनी जेब से हर्जाना भरना पड़ेगा। डायट प्रवक्ता और विकासखंड कौड़िहार की मेंटर डॉ. अंबालिका मिश्रा और उनकी शोध टीम की सदस्य कंपोजिट विद्यालय जगापुर की पूनम चौधरी तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर कायस्थान रितु यादव ने अध्ययन में पाया कि प्रशिक्षण के बावजूद कई शिक्षक किट की सहायता से विज्ञान के आधारभूत सिद्धांत बच्चों को समझा नहीं पा रहे। शोध विषय पर 24 और 25 सितंबर को डायट में 200 विज्ञान शिक्षकों की कार्यशाला भी आयोजित की गई जिसमें शिक्षकों से मिले आंकड़ों का प्रयोग इस शोध अध्ययन में किया गया है।


टीम ने सुझाव दिया है कि संसाधनों की उपलब्धता, प्रबंधन के लिए सहयोग और समर्थन, छात्रों को प्रयोग की छूट और प्रतिभागिता के लिए करियर काउंसिलिंग, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के लिए उपयोग में लाई जा रही विज्ञान किट में संख्या के अनुरूप सामग्री की उपलब्धता पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। डायट प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने बताया कि यह शोध राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) उत्तर प्रदेश की ओर से वर्ष 2025 में प्रकाशित किए जाने वाले रिसर्च जनरल के लिए चुना गया है। पिछले दिनों यह रिपोर्ट एससीईआरटी लखनऊ में प्रस्तुत की गई तो इस अध्ययन के लिए टीम को सम्मानित भी किया गया।

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