जांच में उलझी है बीईओ पर लंबित कार्रवाई
बेसिक शिक्षा परिषद के प्रयागराज जिले के सात अध्यापकों के त्रुटिपूर्ण वेतन एवं अवशेष के रूप में 42 लाख रुपये अनियमित भुगतान किए जाने की शिकायत के मामले में तीन खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) दोषी पाए गए हैं। इसमें अनियमित भुगतान की वसूली किए जाने के बजाय मामले को गंभीर नहीं लिया गया। वित्त नियंत्रक की जांच के आधार पर अनुशासनिक कार्यवाही के लिए अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कान्तालाल पाल ने वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी शिक्षा निदेशालय (बेसिक) प्रयागराज पवन सिंह को पत्र लिखकर जांच अधिकारी नामित किया।
वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी ने पत्र में लिखा है कि मामले में वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा जांच कर आख्या महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजी गई है। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि त्रुटिपूर्ण वेतन एवं अवशेष के रूप में किए गए अनियमित भुगतान के लिए प्राथमिकता से संबंधित विकासखंडों के बीईओ दोषी हैं। हालांकि, इनके द्वारा कराए गए भुगतान पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।
जांच अधिकारी ने बीएसए की भूमिका को ठीक नहीं माना है। तीनों खंड शिक्षा अधिकारी वर्तमान में प्रयागराज, बिजनौर, पीलीभीत और गौतमबुद्धनगर में तैनात हैं। सहायक शिक्षा निदेशक (सेवा-2) शिक्षा निदेशालय डॉ. इरफान खान ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए दोषी बीईओ से अनियमित भुगतान की वसूली किए जाने के लिए लिखा।
इस पर अपर निदेशक ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियमों के अंतर्गत अनुशासनिक कार्रवाई संस्थित कर जांच अधिकारी नामित किए जाने का पत्र लिखा है। अब जांच अधिकारी द्वारा सक्षम अधिकारी को नामित किए जाने का पत्र लिखे जाने के बाद इसमें नए जांच अधिकारी नामित होने हैं।
इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री द्वारा वर्ष 2019 में की गई थी, जिसमें जांच आख्या 2023 में प्रस्तुत की गई। उसके बाद से कार्रवाई किए जाने की फाइल चल रही है।

