17 January 2026

आरक्षित वर्ग के मेधावी सामान्य श्रेणी की सीटों के हकदार


नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि आरक्षित श्रेणी के उन अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीट पर समायोजित किया जाना चाहिए, जिन्होंने सामान्य श्रेणी के लिए निर्धारित कटऑफ अंक से अधिक अंक हासिल किए हैं।



न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने इस ऐतिहासिक कानूनी सिद्धांत की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अब कानून का एक स्थापित सिद्धांत है कि आरक्षित श्रेणी एससी, एसटी और ओबीसी से जुड़े उस अभ्यर्थी को खुले या अनारक्षित रिक्त पद पर भर्ती के लिए योग्य माना जाएगा, जिसने सामान्य श्रेणी के लिए निर्धारित कट-ऑफ अंकों से अधिक अंक हासिल किए हैं। पीठ ने केरल हाईकोर्ट के साल 2020 के फैसले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को एक अनारक्षित उम्मीदवार को सामान्य सूची से मेधावी आरक्षित श्रेणी (एमआरसी) के अभ्यर्थियों को बाहर करके नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।


योग्यता आधारित बदलाव अनुच्छेद-14 और 16 की जरूरत


फैसला लिखने वाले जस्टिस शर्मा ने कहा कि ‘अनारक्षित’ श्रेणी सामान्य उम्मीदवारों के लिए ‘कोटा’ नहीं है, बल्कि यह एक ‘खुला’ समूह है, जो पूरी तरह से योग्यता के आधार पर सभी के लिए उपलब्ध है। फैसले में कहा गया कि यह ‘योग्यता-आधारित बदलाव’ अनुच्छेद-14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद-16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) की एक जरूरत है। इसमें कहा गया कि जब आरक्षित श्रेणी का कोई अभ्यर्थी बिना किसी रियायत (जैसे आयु या शुल्क में छूट) का इस्तेमाल किए सामान्य उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है, तो उसे ‘खुले’ उम्मीदवार के रूप में गिना जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि इससे आरक्षित कोटे की सीट उस विशिष्ट आरक्षित श्रेणी के अगले सबसे योग्य उम्मीदवार के लिए उपलब्ध रहती है।


यह था मामला


यह विवाद 2013 में एएआई की ओर से जूनियर असिस्टेंट (अग्निशमन सेवा) के 245 पदों पर की गई भर्ती से उपजा था। चयन प्रक्रिया का पालन करते हुए एएआई ने सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों और ओबीसी, एससी तथा एसटी पृष्ठभूमि के मेधावी उम्मीदवारों को शामिल करके 122 अनारक्षित सीटों को भरा था।