09 February 2026

बेसिक शिक्षा विभाग में 20 बरस की सेवा, अब दी पात्रता की परीक्षा

 लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में 20 से 25 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों ने अनुभव प्रमाण पत्र की अनिवार्यता के तहत केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) दी। शनिवार और रविवार को आयोजित सीटीईटी में 20 वर्ष के अभ्यर्थियों से लेकर 50 वर्ष तक की आयु के शिक्षक शामिल हुए।



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से राजधानी सहित प्रदेशभर में दो दिवसीय सीटीईटी का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक नौकरी बचाने की मजबूरी में परीक्षा में बैठे। अलग-अलग केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित परीक्षा में शिक्षकों के साथ प्रधानाध्यापक भी शामिल हुए। कई केंद्रों पर शिक्षक और विद्यार्थी साथ-साथ परीक्षा देते नजर आए। इनमें नौकरी की निरंतरता, पदोन्नति और नई भर्तियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी शामिल थे।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुधांशु मोहन ने बताया कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों से किसी भी प्रकार की शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। उस समय निर्धारित नियमावली के अनुसार योग्यताएं पूरी कर नियुक्तियां हुई थीं। अब सभी कार्यरत शिक्षकों से टीईटी उत्तीर्ण करने की शर्त लागू की गई है।


केस-1

19 साल की नौकरी के बाद सीटीईटी में हुए शामिल


सरोजनीनगर के अनिल सिंह सीटीईटी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि 2006 में सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर नियुक्ति हुई थी। करीब 19 वर्ष हो गए हैं। मेरे पढ़ाए बच्चे अधिकारी रैंक पर है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश किसी भी स्तर पर शिक्षकों के हित में नहीं है।


केस-2

20 साल बाद योग्यता का मांगा जा रहा प्रमाण पत्र


राजाजीपुरम के रहने वाले शिव निवास राव ने बताया कि वर्ष 2005 में सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर नियुक्ति हुई। शिक्षक पद पर नियुक्त होने के 20 साल बाद योग्यता प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। परीक्षा में हमारे बच्चों के उम्र के अभ्यर्थी शामिल हुए।


दो साल के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2025 के आदेश के तहत कक्षा 1 से 8 तक के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया गया है और दो वर्ष के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने की समय-सीमा तय की गई है। इस आदेश के बाद आयोजित पहली सीटीईटी में राजधानी में करीब 200 शिक्षकों ने भाग लिया। प्रदेशभर में इनकी संख्या 5,000 से अधिक बताई जा रही है।