आजाद भारत की पहली आधिकारिक जनगणना 9 फरवरी 1951 से शुरू हुई थी। उसके बाद हर 10 साल में इसे नियमित रूप से किया जाता रहा है। जनगणना से न केवल जनसंख्या का पता चलता है, बल्कि नीति बनाने, योजनाएं बनाने और संसाधनों के उचित बंटवारे में मदद मिलती है।
● यह गिनती 28 फरवरी 1951 तक चली थी, उस समय देश की जनसंख्या लगभग 36 करोड़ थी
● 1872 से शुरू हुई भारत की जनगणना नौवीं थी और देश आजाद होने के बाद पहली जनगणना भी थी
●1881 के बाद से हर 10 साल में जनगणना होने लगी, 1941 में आजादी से पहले आखिरी जनगणना हुई थी
●इस दौरान लोगों के नाम, उनकी उम्र, धर्म, जाति और आजीविका जैसे कुछ जरूरी सवाल पूछे गए थे
●उस समय जनगणना में जम्मू-कश्मीर को छोड़ दिया गया था, वहां का डाटा पुराने आंकड़ों से लिया गया
●1951 में भारत के जनगणना आयुक्त आर. ए. गोपालस्वामी थे, वह 1949 से 1953 तक पद पर रहे
●उस समय 36.1 करोड़ की आबादी में से केवल 18 फीसदी से कुछ अधिक लोग पढ़-लिख सकते थे
●1951 की जनगणना के बाद भारत का पहला राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार हुआ था
●2011 तक भारत में 15 जनगणनाएं हो चुकी हैं, सभी जनगणनाएं भारत जनगणना अधिनियम 1948 के तहत होती हैं

