09 February 2026

बजट : करदाताओं को कई मोर्चों पर मिली राहत

 

बीती एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश कर दिया। इसमें व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आयकर में कोई बदलाव नहीं किया गया लेकिन नए आयकर अधिनियम और आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा जैसे कई बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का असर सभी करदाताओं पर पड़ सकता है। नया आयकर अधिनियम पहली अप्रैल 2026 से लागू होगा। आइये जानते हैं प्रमुख बदलावों के बारे में...

1. कर स्लैब में बदलाव नहीं

इस साल पेश हुए बजट में पुरानी और नई दोनों कर प्रणालियों के तहत व्यक्तियों के लिए आयकर स्लैब की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही शिक्षा उपकर (सेस) और सरचार्ज में भी कोई बदलाव प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

2. नया आयकर कानून

नया आयकर कानून एक अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसका मकसद कर प्रणाली को ज्यादा आसान और समझने लायक बनाना है। सरकार जल्द ही इसके नियम और नए आयकर रिटर्न फॉर्म भी जारी करेगी ताकि करदाताओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।

3. आईटीआर दाखिल करने की समयसीमा अलग-अलग

केंद्र ने व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा अब अलग-अलग कर दी है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने वालों के लिए 31 जुलाई की समयसीमा बनी रहेगी। बिना ऑडिट वाले कारोबारी, विशेष आय वाले व्यक्ति व ट्रस्ट अब 31 अगस्त तक अपना आईटीआर दाखिल कर सकेंगे।

4 . ओवरसीज टूर पैकेज पर टीसीएस कम किया गया

विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के लिए सरकार ने विदेशी टूर पैकेज पर टीसीएस यानी स्रोत पर एकत्रित कर को घटाकर 2% कर दिया है। यह पहले 5% और 20% था। अब कोई न्यूनतम राशि की शर्त नहीं है। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा बुकिंग पर पहले से कम टैक्स देना पड़ेगा। इसके अलावा, 10 लाख रुपये से ज्यादा की स्वपोषित विदेशी शिक्षा और विदेश में मेडिकल इलाज पर टीसीएस भी 5% से घटाकर 2% कर दिया जाएगा।

टीसीएस क्या होता है?

टीसीएस यानी ‘स्रोत पर एकत्रित कर’ है। इसमें टैक्स काटा नहीं जाता, बल्कि बेचने वाला ग्राहक से टैक्स लेकर सरकार को देता है। जैसे आप विदेश टूर पैकेज खरीदते हैं, स्क्रैप, शराब, कुछ मिनरल्स या बड़े लेन-देन वाले सामान खरीदते हैं, तो विक्रेता आपसे टीसीएस वसूल करता है। यह कर आपकी कुल आय का हिस्सा माना जाता है।

बाद में आयकर रिटर्न भरते समय आप इस टीसीएस को समायोजित कर सकते हैं या जरूरत हो तो रिफंड ले सकते हैं। इसका मकसद बड़े खर्चों पर नजर रखना और टैक्स सिस्टम की निगरानी करना है।

5. छोटे निवेशकों की विदेशी संपत्ति का खुलासा योजना

सरकार ने छात्रों, टेक प्रोफेशनल्स और विदेश में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों

(एनआरआई) जैसे छोटे करदाताओं के लिए ‘एक-बार विदेशी संपत्ति खुलासा योजना’ की घोषणा की। इसके लिए छोटे निवेशकों की विदेशी संपत्ति का खुलासा योजना शुरू की है। इस योजना में छह महीने का समय मिलेगा। यह सुविधा एक बार के लिए उन लोगों के लिए है, जिन्होंने पहले विदेश से होने वाली आय और अन्य संपत्तियों का खुलासा नहीं किया था। इसके साथ ही यह उन लोगों के लिए भी, जिन्होंने आमदनी तो बताई थी और कर भी दिया था, लेकिन विदेशी संपत्ति

का खुलासा नहीं कर पाए थे।

इस योजना में आने वाले लोगों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। एक वो, जिन्होंने ऐसी संपत्ति की घोषणा कभी भी आयकर रिटर्न में नहीं की। दूसरी श्रेणी में वो लोग आएंगे, जिन्होंने आय पर कर चुकाया, लेकिन आईटीआर के शेड्यूल एफए में कुछ संपत्तियां नहीं बताईं। पहली श्रेणी में संपत्ति की सीमा 1 करोड़ रुपये तक होगी। वहीं, दूसरी में यह सीमा 5 करोड़ रुपये तक होगी। पहली श्रेणी में आने वालों को 60 फीसदी भुगतान (30 फीसदी टैक्स, 30 फीसदी जुर्माना) देना होगा। वहीं दूसरी श्रेणी में एकमुश्त 1 करोड़ जुर्माना चुकाना होगा। दोनों ही श्रेणियों में जेल की सजा या मुकदमे से पूरी छूट मिलेगी। इस उपाय का मकसद स्वत: कर अनुपालन का मौका देकर वित्तीय पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को बेहतर बनाना है।

6. विदेशी छोटी संपत्तियों के खुलासे पर छूट का फैसला

बजट में उन लोगों को राहत देने का फैसला लिया गया है, जो विदेश में मौजूद अपनी छोटी-मोटी संपत्ति की जानकारी टैक्स रिटर्न में भूलवश नहीं दे पाए थे। अगर किसी व्यक्ति की गैर-अचल विदेशी संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और वह उसका खुलासा नहीं करता है तो उस पर अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में सजा से छूट मिलेगी। यह नया नियम 1 अक्टूबर 2024 से लागू होगा, जिससे सीमित विदेशी संपत्ति रखने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

7. करदाताओं के लिए शून्य या कम टीडीएस सर्टिफिकेट

केंद्र सरकार ने अब मैनपावर सप्लाई को ठेकेदार की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब हुआ कि टीडीएस सिर्फ 1% या 2% लगेगा। इसे प्रोफेशनल फीस मानकर ज्यादा टीडीएस नहीं काटा जाएगा। छोटे करदाताओं को आकलन अधिकारी के पास आवेदन नहीं करना होगा। ऑनलाइन, ऑटोमेटेड सिस्टम से कम या शून्य टीडीएस सर्टिफिकेट मिल सकेगा। यानी कम दस्तावेज लगेंगे और भागा-दौड़ी भी कम होगी। टीडीएस का पूरा नाम स्रोत पर कर कटौती है। इसका मतलब है कि जब आपको कोई तय तरह की आय मिलती है, जैसे वेतन, ब्याज, किराया, प्रोफेशनल फीस या कमीशन, तो रकम देने वाला व्यक्ति या कंपनी पहले ही कुछ कर काट लेती है। बाकी रकम आपको देती है।

जो टीडीएस काटा जाता है, वह सरकार के पास जमा कर दिया जाता है। बाद में यही काटा गया कर (टीडीएस) आपके रिटर्न में समायोजित हो जाता है।


ऐसे विशेषज्ञों को कर में छूट मिलेगी
वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के मकसद से, भारत आने वाले विशेषज्ञों को पांच साल तक की अवधि के लिए विदेशी आय पर छूट दी गई है। टैक्स छूट पाने के लिए, व्यक्ति पिछले पांच सालों से अनिवासी होना चाहिए, सरकार द्वारा अधिसूचित योजना के तहत सेवाएं देनी चाहिए और बताई गई अन्य शर्तों को भी पूरा करना चाहिए।