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19 February 2026

कानून बनाकर खतरनाक मांझे का निर्माण-प्रयोग रोकें: हाई कोर्ट

  हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चाइनीज मांझा कहे जाने वाले लेड-कोटेड व नायलॉन मांझों की खरीद-बिक्री व इस्तेमाल रोकने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने कहा है कि इस पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए सिर्फ शासनादेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है बल्कि कानून बनाकर इसे रोकना होगा। न्यायालय ने राज्य सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि तथाकथित चाइनीज मांझों की निर्माण-बिक्री और इस्तेमाल जारी रहा तो हम पीड़ितों को सरकार द्वारा मुआवजा देने का आदेश देने को मजबूर होंगे। मामले की अगली सुनवायी के लिए 11 मार्च की तिथि नियत करते हुए, सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।



यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर पारित किया। मामले की सुनवायी के दौरान याची ने न्यायालय को बताया कि फरवरी में लगभग दस लोग ऐसे मांझों से घायल हुए या उनकी मृत्यु हुयी। याचिका पर जवाब देते हुए, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 9 और 10 अक्टूबर को शासनादेश जारी करते हुए, मांझों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया जा चुका है। यह भी कहा गया कि ये सिंथेटिक मांझे हैं जिन्हें ‘चाइनीज मांझा’ गलत नाम दे दिया गया है, इससे ऐसा लगता है कि ये मांझे चीन से आयात होकर यहां आते हैं जबकि ऐसा नहीं है। 


रोकने के लिए कठोर प्रावधानों की जरूरत

सरकार की दलील से न्यायालय संतुष्ट नहीं हुआ। न्यायालय ने कहा कि जब भी ऐसे मांझे से गंभीर चोटें या मृत्यु की घटनाएं घटित होती हैं और वे मीडिया की सुर्खियां बनती हैं, तभी अधिकारी सक्रिय होते हैं, जबकि आवश्यक है कि ऐसे मांझे के निर्माण, विक्रय और उपयोग की रोकथाम के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें नियमित और निरंतर निगरानी की व्यवस्था हो। साथ ही इस पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा इसमें संलिप्त व्यक्तियों को उनके कृत्यों के लिए उत्तरदायी ठहराने के लिए विधि में उपयुक्त एवं कठोर प्रावधान किया जाना अनिवार्य है।

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