परिषदीय स्कूलों में एमडीएम खाने के लिए बच्चों को अपने घर से थाली-गिलास लेकर जाना पड़ता है। यह खुलासा जिलाधिकारी व विभागीय उच्चाधिकारियों के निरीक्षण में हुआ। आरोप है कि स्कूल के जिम्मेदार शिक्षक ने कंपोजिट ग्रांट से थाली-गिलास की खरीददारी नहीं की। डीएम की नाराजगी पर बीएसए ने जिले के सभी बीईओ को आदेश जारी कर कंपोजिट ग्रांट से थाली-गिलास का क्रय कराने को कहा है। निर्देश का पालन न होने पर संबंधित पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।
उच्चाधिकारियों के निरीक्षण में कुछ स्कूलों में बच्चे स्वयं की थाली-गिलास लेकर भोजन ग्रहण करते मिले। इसपर नाराजगी जताई। जिन स्कूलों में थाली-गिलास खराब हो चुके हैं उनमें कंपोजिट ग्रांट से जिम्मेदारों को थाली-गिलास क्रय करने के निर्देश हैं। आदेश का पालन न होने पर कार्यवाही की जाएगी।
बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट स्कूलों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को पीएम पोषण (मध्यान्ह भोजन) योजना के तहत दोपहर में सप्ताहिक मैन्यू के हिसाब से पका-पकाया भोजन, दूध, केला आदि मुहैया कराया जाता है। यहां तक कि बच्चों को बर्तन (थाली-गिलास) भी स्कूल से दिया जाता है। यह बर्तन कंपोजिट ग्रांट से खरीदे जाते हैं। आरोप है कि जिन स्कूलों में बर्तन खराब हो चुके हैं उनमें अब तक नए थाली-गिलास क्रय नहीं किए गए हैं। एमडीएम खाने के वक्त बच्चों को अपने घर से थाली-गिलास लाना पड़ता है। ऐसा डीएम और विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण में देखने को मिला। डीएम ने नाराजगी भी जताई। इसपर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले भर के सभी बीईओ को आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि पीएम पोषण योजना से अच्छादित ऐसे विद्यालय जिनमें छात्रों के प्रयोग में आने वाली थाली-गिलास खराब हो चुके हैं। उनमें कंपोजिट ग्रांट से प्रथम चरण में गुणवत्तापरक थाली और द्वितीय चरण में गिलास क्रय करने के निर्देश हैं लेकिन निरीक्षण में बच्चे स्वयं के थाली-गिलास का उपयोग कर रहे हैं जो गलत है। आदेश में छात्र-छात्राओं के लिए भोजन ग्रहण करने को शीघ्र थाली-गिलास क्रय करने को कहा गया है। साथ ही अगर उच्चाधिकारियों के निरीक्षण में बच्चों के पास स्वयं के थाली-गिलास मिलने पर संबंधित प्रधानाध्यापक, इंचार्ज अध्यापक के साथ साथ खंड शिक्षाधिकारी का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की चेतावनी दी गई है।
