30 May 2026

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदेश में 1.86 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे... संगठन लड़ेंगे लड़ाई: केंद्र ने गुपचुप तरीके से किया संशोधन

 लखनऊ। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यूपी में 1.86 लाख से अधिक और देश भर में 22 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे। शुक्रवार को शीर्ष अदालत के फैसले से प्रदेश के शिक्षकों में मायूसी है। निर्णय से असंतुष्ट शिक्षकों ने सड़क से संसद तक आर-पार की लड़ाई की बात कही है।

टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि हम हार नहीं मानेंगे और अधिवक्ताओं से राय लेकर क्यूरेटिव पिटीशन डालेंगे। सड़क पर भी आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे। केंद्र सरकार से भी शिक्षकों को राहत देने की बात कहेंगे। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने हमेशा कानून, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए अपनी लड़ाई लड़ी है। किंतु लंबे समय से लंबित व न्यायोचित मुद्दों पर शिक्षकों को निराशा मिलना पीड़ादायक है। महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि संगठन इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देगा।

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ जल्द ही देशभर के शिक्षक संगठनों, प्रतिनिधियों व विधिक विशेषज्ञों के साथ इस पर मंथन कर आगे की रणनीति तय करेगा। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक सड़क से सदन तक आंदोलन करेंगे।

केंद्र ने गुपचुप तरीके से किया संशोधन

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि केंद्र ने गुपचुप तरीके से 2017 में संशोधन कर 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता संबंधी काला कानून लागू कर दिया। इसके संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को दिए गए आदेश में राहत नहीं मिली है। इससे देश के प्रभावित लाखों शिक्षक काफी निराश हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की है कि धैर्य बनाए रखें। संगठन द्वारा फिर से सड़क से सदन तक संघर्ष किया जाएगा।