याची को अंतिम वेतन के अनुसार पेंशन भुगतान करने का निर्देश
प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद वेतनमान का पुनर्निर्धारण सुप्रीम कोर्ट के जगदीश प्रसाद सिंह केस में दिए गए निर्णय तथा 16 जनवरी 2007 के शासनादेश के विरुद्ध है। इसलिए न तो अधिक भुगतान की वसूली की जा सकती है और न ही पेंशन में कटौती की जा सकती है।
इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने पेंशन कटौती संबंधी एनई रेलवे प्रयागराज का सात जनवरी का आदेश रद्द कर इसे चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन का निर्धारण करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने बाबूराम की याचिका पर अधिवक्ता वीरेन सिंह राठौर व राज्य सरकार के अधिवक्ता को सुनकर दिया है। याची 31 नवम्बर 2025 को सेवानिवृत्त हुआ। याची के अधिवक्ता के अनुसार पहली जुलाई 2011 की तिथि से वेतनमान पुनर्निर्धारित कर पेंशन घटा दी गई। याची को कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। 2008 में गलत वेतन निर्धारण किया गया था। अधिक भुगतान की वसूली सेवानिवृत्ति के बाद नहीं की जा सकती। कोर्ट ने सुशील सिंघल केस के हवाला देते हुए कहा, “एनई रेलवे का आदेश विधि विरुद्ध है। विभागीय गलती के लिए सेवानिवृत्त कर्मी को दंडित नहीं कर सकते।”

