पेयजल की व्यवस्था न होने और उपस्थिति ज्यादा दिखाने पर 14 स्कूलों को नोटिस
प्रयागराज। पेयजल की व्यवस्था न होने, गंदगी, शिक्षक डायरी, विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति ज्यादा दिखाने पर 14 विद्यालयों को बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अनिल कुमार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि आपके विद्यालय में पढ़ाई का कोई माहौल नहीं है, क्यों न आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि 27 मई तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई होगी। इसमें सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
कोरांव ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय नेवढ़िया पाल में अनियमितताएं सामने आईं। यहां छात्र उपस्थिति से लेकर साफ-सफाई और अभिलेखों में लापरवाही मिली। इस पर बीएसए ने प्रधानाध्यापक केशव प्रसाद सिंह सहित आठ शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अभिलेखों में 91 छात्रों की उपस्थिति दर्ज मिली, जबकि मौके पर 23 ही थे। विद्यालय में 359 छात्रों का नामांकन है पर नए सत्र में अब तक 12 बच्चों का ही प्रवेश कराया गया है। शिक्षकों की समय से उपस्थिति नहीं हो रही थी।
कोरांव क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चरकी संसारपुर में 78 छात्र नामांकित हैं। निरीक्षण में केवल चार बच्चे ही उपस्थित मिले। बीएसए ने प्रधानाध्यापिका उर्मिला मौर्य और इंचार्ज प्रधानाध्यापक कमला शंकर राठौर को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। स्कूल चलो अभियान के तहत अब तक केवल आठ नए बच्चों का ही नामांकन किया गया है।
कोरांव विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय रंगनाथ पहाड़ी में बीएसए ने छह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विद्यालय में 160 छात्रों के नामांकन के सापेक्ष केवल 14 छात्र उपस्थित मिले। जांच में यह भी सामने आया कि एमडीएम रजिस्टर में वास्तविक उपस्थिति से अधिक छात्रों की संख्या दर्ज की गई थी। विद्यालय में कई शिक्षक अनुपस्थित मिले और परिसर में गंदगी थी। अनुपस्थित शिक्षक का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
साथ ही विकास खंड कोरांव स्थित कंपोजिट विद्यालय पथरताल, प्राथमिक विद्यालय मुरलीपुर गड़िया, उच्च प्राथमिक विद्यालय बंशीपुर, कंपोजिट स्कूल भावानीपुर समेत विभिन्न विद्यालय शामिल हैं।
कई खामियां मिलीं
- विद्यालय के एमडीएम पंजिका में उपस्थिति के सापेक्ष अधिक संख्या
- पूर्व सत्र में डीबीटी से लाभान्वित कक्षा वार छात्रों की सूची नहीं है
- शैक्षिक गुणवत्ता का न्यून स्तर पाया जाना
- तीन वर्षों में प्राप्त कंपोजिट ग्रांट व्यय का विवरण
- विद्यालय में गंदगी का अंबार लगना

