20 May 2026

इंचार्ज हेडमास्टर पोस्टिंग में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया

 इंचार्ज हेडमास्टर पोस्टिंग में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया


सुल्तानपुर।


इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ


रिट - ए संख्या 5122 / 2026


रेखा पाण्डेय — याचिकाकर्ता

बनाम

उत्तर प्रदेश राज्य, प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग, लखनऊ एवं 2 अन्य — प्रतिवादी


याचिकाकर्ता के अधिवक्ता: विनोद कुमार पाण्डेय, राकेश कुमार श्रीवास्तव, सुयश कुमार पाण्डेय

प्रतिवादी के अधिवक्ता: सी.एस.सी., शैलेन्द्र सिंह राजावत


न्यायालय संख्या - 2

माननीय श्रीमती संगीता चन्द्रा, न्यायमूर्ति


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आदेश का हिंदी अनुवाद


1. याचिकाकर्ता के विद्वान अधिवक्ता तथा राज्य प्रतिवादी संख्या-1 की ओर से उपस्थित स्थायी अधिवक्ता एवं प्रतिवादी संख्या-2 की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता श्री शैलेन्द्र सिंह राजावत को सुना गया।


2. यह रिट याचिका निम्न मुख्य प्रार्थनाओं के साथ दाखिल की गई है—


(i) प्रतिवादी संख्या-2 द्वारा दिनांक 10.04.2026 को पारित आदेश (जो इस याचिका के परिशिष्ट संख्या-1 में संलग्न है) को निरस्त करने हेतु सर्टियोरारी प्रकृति की रिट / आदेश / निर्देश जारी किया जाए।


(ii) प्रतिवादी संख्या-2 को यह निर्देश देते हुए मण्डामस प्रकृति की रिट / आदेश / निर्देश जारी किया जाए कि वे याचिकाकर्ता को उच्च प्राथमिक विद्यालय बसौंदी, ब्लॉक-कूरेभार, जनपद-सुल्तानपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने से न रोकें, जब तक कि विधिवत चयनित प्रधानाध्यापक उस पद पर कार्यभार ग्रहण न कर लें।


3. प्रतिवादी संख्या-3 को नोटिस जारी किया जाए, जो दस्ती (व्यक्तिगत सेवा) तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से भी तामील कराया जाएगा।


4. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही तत्काल कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे।


5. प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सुल्तानपुर ने, जिन कारणों की जानकारी वही बेहतर रखते हैं, उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश दिनांक 14.10.2025 को गलत तरीके से समझा / लागू किया है।


6. शासनादेश के पैरा-6 में स्पष्ट प्रावधान है कि जिला स्तर पर वरिष्ठता सूची जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा तैयार की जाएगी तथा सर्वाधिक वरिष्ठ शिक्षकों को प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में नियुक्ति की पेशकश की जाएगी। आगे यह भी प्रावधान है कि यदि सर्वाधिक वरिष्ठ शिक्षक लिखित रूप में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने की अनिच्छा व्यक्त करता है, तब तैयार वरिष्ठता सूची में अगले वरिष्ठ शिक्षक पर विचार किया जाएगा और उसे यह नियुक्ति प्रदान की जाएगी।


7. श्री शैलेन्द्र सिंह राजावत ने मौखिक निर्देशों के आधार पर कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अतिरिक्त रूप से एक विज्ञापन जारी किया, जिसमें शिक्षकों से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य करने हेतु लिखित सहमति प्रस्तुत करने को कहा गया।


8. यह न्यायालय प्रथम दृष्टया इस मत का है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सुल्तानपुर ने, संभवतः सद्भावना (bona fide) के अभाव में, कुछ व्यक्तियों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से ऐसी प्रक्रिया अपनाई है, जिससे वरिष्ठतम शिक्षकों के वैध दावे की अनदेखी की गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कार्यालय शिक्षकों से प्राप्त पत्राचार को नकार या नष्ट भी कर सकता है और बाद में यह कह सकता है कि कोई लिखित सहमति प्राप्त नहीं हुई, विशेष रूप से तब जबकि संपूर्ण अभिलेख जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय की अभिरक्षा में हैं।


9. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सुल्तानपुर दिनांक 26.05.2026 को इस न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे और यह स्पष्ट करेंगे कि उन्होंने शासनादेश दिनांक 14.10.2025 को गलत तरीके से क्यों समझा / लागू किया। साथ ही यह भी कारण बताएं कि क्यों यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव को उनके विरुद्ध उपयुक्त विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु संदर्भित न किया जाए, यदि ऐसा आवश्यक पाया जाए।


10. इस प्रकरण को दिनांक 26.05.2026 को सूचीबद्ध किया जाए।


दिनांक: 19 मई, 2026

(श्रीमती संगीता चन्द्रा, न्यायमूर्ति)