11 May 2026

आखिर यह कौन सा जीव है? लोगों ने बताया इच्छाधारी सांप, वैज्ञानिक भी हैरान

 एक ऐसी नई प्रजाति की खोज हुई है, जिसने अपनी बदलती बनावट और अलग-अलग रूपों के कारण शोधकर्ताओं को भी हैरान कर दिया है। इस नई प्रजाति का नाम अयेयारवाडी पिट वाइपर रखा गया है, जो म्यांमार की सबसे अहम नदियों में से एक अयेयारवाडी नदी के नाम पर है। म्यांमार में वैज्ञानिकों ने सांप की यह नई प्रजाति खोज निकाली है। खास बात यह है कि यह सांप कभी एक प्रजाति जैसा दिखता है तो कभी दूसरी प्रजाति जैसा, जिससे वैज्ञानिक लंबे समय तक यह तय नहीं कर पाए कि यह वास्तव में नई प्रजाति है या दो अलग-अलग सांपों का हाइब्रिड।




 यह सांप ट्रिमेरेसुरस ग्रुप का हिस्सा है, जो पहले से ही अपनी जटिल पहचान के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिकों को यह सांप म्यांमार के मध्य क्षेत्र में मिला, जहां 2 अन्य पिट वाइपर प्रजातियों का निवास क्षेत्र भी है। इनमें एक रेडटेल पिट वाइपर है, जो चमकीले हरे रंग का और बिना निशानों वाला होता है। दूसरा मैंग्रोव पिट वाइपर है, जिसके शरीर पर गहरे धब्बे पाए जाते हैं। नई प्रजाति में ये दोनों ही विशेषताएं देखी गईं। कुछ सांप पूरी तरह हरे और साफ दिखे, जबकि कुछ पर धब्बे थे और कई सांप दोनों के बीच जैसे लगे। सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है और कुछ लोग तो इसे इच्छाधारी सांप बता रहे हैं।


 असमंजस में क्यों पड़े वैज्ञानिक

शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि यह किसी तरह का हाइब्रिड यानी दो प्रजातियों के मेल से पैदा हुआ सांप हो सकता है। लेकिन जब इसके डीएनए और आनुवंशिक संरचना की जांच की गई तो नतीजे चौंकाने वाले निकले। अध्ययन से पता चला कि यह किसी दूसरी प्रजाति का मिश्रण नहीं, बल्कि खुद में एक अलग और स्वतंत्र प्रजाति है। शोधकर्ताओं का मानना है कि अतीत में इस सांप के पूर्वजों ने आसपास की दूसरी प्रजातियों के साथ जीन का आदान-प्रदान किया होगा, जिसकी वजह से इसकी बनावट इतनी विविध दिखाई देती है।


 वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज जीवों की पहचान के पारंपरिक तरीकों को चुनौती देती है। अब तक प्रजातियों की पहचान मुख्य रूप से उनके शारीरिक स्वरूप के आधार पर की जाती थी, लेकिन अयेयारवाडी पिट वाइपर ने दिखाया है कि केवल बाहरी बनावट हमेशा सही संकेत नहीं देती। इस खोज ने आनुवंशिक टेस्ट की अहमियत को और बढ़ा दिया है। साथ ही यह भी साफ हुआ कि म्यांमार जैसे जैव विविधता वाले क्षेत्रों में अब भी कई रहस्यमयी और अनदेखी प्रजातियां मौजूद हो सकती हैं, जिनके बारे में विज्ञान को अभी बहुत कुछ जानना बाकी है।