रसोइया स्पेशल: नामांकन कम होने पर किस रसोइया को पद से हटाया जाएगा?
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नामांकन घटने अथवा विद्यालयों के संविलियन (Merger) की स्थिति में यदि स्वीकृत संख्या से अधिक रसोइया कार्यरत हो जाते हैं, तो उन्हें कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया शासनादेश दिनांक 24 अप्रैल 2010 तथा अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार के 4 अक्टूबर 2019 के आदेश के अनुसार की जाती है।
कार्यमुक्त करने का क्रम
1. सबसे पहले उन रसोइयों को हटाया जाएगा जिनका पाल्य (बच्चा) संबंधित विद्यालय में अध्ययनरत नहीं है। रसोइया चयन में विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की माता, दादी, बहन, चाची, ताई या बुआ को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए अतिरिक्त रसोइयों की स्थिति में पहले ऐसे रसोइयों को कार्यमुक्त किया जाएगा जिनका कोई पाल्य उस विद्यालय में नहीं पढ़ता।
2. यदि इसके बाद भी अतिरिक्त रसोइया शेष रहें तो “Last In First Out” नियम लागू होगा। अर्थात सबसे बाद में चयनित रसोइया को पहले कार्यमुक्त किया जाएगा।
3. यदि एक ही समय या एक ही सत्र में एक से अधिक रसोइयों का चयन हुआ हो तो कम आयु वाली रसोइया को कार्यमुक्त किया जाएगा। ऐसी स्थिति में अधिक आयु वाली रसोइया को प्राथमिकता मिलेगी।
4. विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को विशेष प्राथमिकता शासनादेश के अनुसार चयन प्रक्रिया में विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए यथासंभव ऐसी रसोइयों को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
महत्वपूर्ण नोट
रसोइयों के लिए सेवानिवृत्ति की कोई निर्धारित आयु नहीं है। इसलिए केवल अधिक आयु होने के आधार पर किसी रसोइया को पद से नहीं हटाया जा सकता।
संक्षेप में हटाने का क्रम:
- जिनका पाल्य विद्यालय में अध्ययनरत नहीं है।
- सबसे बाद में चयनित रसोइया (Last In First Out)।
- समान चयन वर्ष होने पर कम आयु वाली रसोइया।
- विधवा/परित्यक्ता को यथासंभव संरक्षण।
यह व्यवस्था विद्यालयों में रसोइयों के समायोजन एवं अतिरिक्त पदों के निर्धारण के लिए लागू की जाती है।

