नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) ने कृषि बिल की वापसी का उदाहरण देते हुए 2017 में हुए संशोधन को रद्द करने की मांग की है। इसके अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह संशोधन उनके अधिकारों का उल्लंघन करता है और शिक्षकों को संघर्ष के लिए सड़कों पर आने का आह्वान किया।
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) ने कहा है कि जब कृषि बिल वापस हो सकता है तो वर्ष 2017 में हुआ संशोधन क्यों नहीं रद्द हो सकता। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने फेसबुक लाइव के दौरान देशभर के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश फैसला है न कि न्याय। उन्होंने कहा कि 2017 में जब केंद्र सरकार द्वारा संशोधन लाया गया तो उसमें केवल मिनिमम योग्यता की बात कही गई। उसमें कहीं भी नहीं लिखा है कि 25 वर्ष पहले नियुक्त शिक्षक पर टीईटी लागू होगा।
शिक्षकों के अधिकारों का उल्लंघन
इस संशोधन के सहारे सरकार ने देशभर के शिक्षकों के साथ छल किया है और षड्यंत्र के तहत शिक्षकों की नौकरी खतरे में डाल दी। शिक्षकों द्वारा 25 वर्ष में पढ़ाए गए बच्चे जो सांसद, विधायक, अधिकारी डॉक्टर बन गए तब तो वे भी अयोग्य हो गए। वर्षों पूर्व देश में जिनकी शादी 15 या 16 वर्ष में हुई जो कि वर्तमान में नाबालिग हैं तो क्या वह सभी शादियां अवैध हैं, क्या उनके बच्चे भी अयोग्य हैं, शिक्षकों को सरकार की साजिश को समझना चाहिए।
संघर्ष का आह्वान
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान करते हुए कहा कि अगर आपका नेतृत्व आज भी अलगाव के रास्ते पर ही चलना चाहता है और आत्मकेन्द्री, अहंकेन्द्री दृष्टिकोण रखता है तो समय आ गया है कि खुलकर ऐसे संगठन और नेतृत्व का बहिष्कार करें। अन्यथा जो शिक्षामित्रों के साथ हुआ, जो डायल 100 की महिला आपरेटर के साथ हुआ, जो बीएसएनएल और एयर इंडिया के कर्मचारियों के साथ हुआ, वही आपके और मेरे साथ भी होगा। जो शिक्षक आज टीईटी अनिवार्यता के दायरे से बाहर हैं, उनके साथ भी भविष्य में कोई नया कानून लाकर उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। उन्होंने देशभर के शिक्षकों से सड़क पर आकर संघर्ष करने का आह्वान किया.

