18 July 2026

एसआईआर में नाम कटने से नागरिकता नहीं जाती


नई दिल्ली, एजेंसी। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कहा कि एसआईआर प्रकिया में नाम कटने की वजह से किसी की नागरिकता अपने आप खत्म नहीं होती। चुनाव आयोग नागरिकता से जुड़े मामलों पर कोई निर्णय नहीं ले सकता है। अदालत ने साफ किया कि एसआईआर से जुड़े बिहार के मामले में हमने ये पहले भी स्पष्ट किया था।



पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी जनहित याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की पीठ के समक्ष पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस की याचिका आई थी। अधिवक्ता नेहा राठी के जरिये दायर याचिका में एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं द्वारा दायर दावों और आपत्तियों का विधानसभावार आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग की गई है।


सरकारी योजनाओं से वंचित करने का मुद्दा उठाया:याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटने के बााद शिकायतों के अंतिम निस्तारण से पहले ही कई लोगों को सरकारी राशन और अन्य योजनाओं का लाभ, जाति प्रमाणपत्र जैसे नागरिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े निर्णय में भी इस मुद्दे पर बात की है। उन्होंने कहा, ‘बिहार मामले में दिए गए फैसले में हमने साफ किया है कि चुनाव आयोग मतदान से जुड़े अधिकारों पर निर्णय लेने के तुरंत बाद नागरिकता पर फैसला नहीं ले सकता। चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी है कि वह नागरिकता कानून के तहत फैसले के लिए मामले को संबंधित मंत्रालय को भेजे।’


शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग के अधिकार क्षेत्र में सिर्फ मतदाता सूचियों का नियंत्रण और निगरानी है। पीठ ने इस नई याचिका को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित एसआईआर से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ 25 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।


सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों द्वारा दाखिल दावों और आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ा सार्वजनिक करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा।