प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तदर्थ सेवा को नजरअंदाज कर कर्मचारी को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की अदालत ने अलीगढ़ निवासी कृष्णपाल गंगवार की याचिका पर की है। कोर्ट ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ देने से इन्कार करने वाला राज्य सरकार का आदेश रद्द करते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को तदर्थ सेवाकाल को जोड़कर दो माह के भीतर नया निर्णय लेने का आदेश दिया है.
याची ने 29 नवंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उसकी तदर्थ सेवा की अवधि को नजरअंदाज करते हुए पेंशन का दावा खारिज कर दिया गया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के नंदलाल के मामले में दिए गए फैसले के आधार पर कई अन्य मामलों में हाईकोर्ट पहले ही निर्णय दे चुका है कि नियमितीकरण से पूर्व की तदर्थ सेवा भी पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाएगा.
कोर्ट ने कहा कि जब समान विवाद पर कानून पहले ही स्पष्ट हो चुका है, तब विभाग की ओर से पुरानी पेंशन से इन्कार करने वाला आदेश कानून की नजर में कहीं टिक नहीं सकता है। ब्यूरो

