26 August 2026

मकान मालिक नहीं बढ़ा सकेंगे मनमाना किराया, हाईकोर्ट ने 2021 एक्ट की पांच धाराएं की रद्द

मकान मालिक नहीं बढ़ा सकेंगे मनमाना किराया, हाईकोर्ट ने 2021 एक्ट की पांच धाराएं की रद्द

लखनऊ। मकान मालिकों की ओर से किराया मनमाने ढंग से बढ़ाने पर अब रोक लगेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम-2021 की पांच धाराओं को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले से पुराने किरायेदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने 2021 के कानून की धारा-8, 9, 10, 3एस और 42 को रद्द किया है। अदालत ने कहा कि किरायेदारी संबंधी कानून राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया था, लेकिन यदि राज्य का कानून पहले से लागू केंद्रीय कानून से टकराता है तो संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है। 2021 के कानून को ऐसी मंजूरी नहीं मिली थी।


हर साल 5 या 7 प्रतिशत किराया बढ़ाने की बाध्यता नहीं

2021 के कानून में पुराने किरायेदारों के लिए आवासीय परिसरों के किराए में पांच प्रतिशत और गैर-आवासीय परिसरों में सात प्रतिशत वार्षिक बढ़ोतरी का प्रावधान था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह व्यवस्था लागू नहीं रहेगी।

अब किराया बढ़ाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के बीच हुए समझौते तथा लागू पुराने कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखा जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी दुकान का किराया 10 हजार रुपये है तो केवल 2021 के कानून के हवाले से उसमें पांच या सात प्रतिशत की मनमानी बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी।

किराया विवाद में रेंट अथॉरिटी की भूमिका भी खत्म

अदालत के फैसले के बाद धारा-10 के तहत किराए को लेकर विवाद होने पर रेंट अथॉरिटी द्वारा किराया निर्धारित करने की व्यवस्था भी समाप्त हो गई है। अब मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराए से संबंधित विवाद पुराने लागू कानूनी प्रावधानों के तहत देखे जाएंगे।

फैसले का असर उन किरायेदारी समझौतों पर भी पड़ सकता है, जिनमें 2021 के कानून के आधार पर किराया बढ़ाया गया था। पुराने किरायेदारों के लिए यह फैसला विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


मकान मालिक के किराया मामले में फैसले का क्या होगा असर