● प्रोटोटाइप टू प्रैक्टिस में सात नवाचार का हुआ प्रजेंटेशन
कानपुर। एआई मंथन 2.0 के पहले दिन के अंतिम सत्र प्रोटोटाइप टू प्रैक्टिस में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में सात प्रस्तुति दी गई।
ओवरलैब्स के संस्थापक अभि आनंद ने अपने प्रोटोटाइप के माध्यम से बताया कि यह प्रणाली हस्तलिखित उत्तर पुस्तिकाओं के एआई आधारित मूल्यांकन के लिए विकसित की गई है। सीएसजेएमयू में करीब 150 विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं पर इसका प्रयोग किया गया है। यह एक दिन में करीब 20 हजार उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकती है। इसमें अंतिम निर्णय और अंकों में बदलाव का अधिकार फैकल्टी के पास होगा। इसी तरह अन्य स्टार्टअप के फाउंडर ने भी अपने नवाचार का प्रजेंटेशन दिया।
गेस्टोरा सॉल्यूशंस के आदर्श पाठक ने बताया कि यह पुराने शैक्षणिक रिकार्ड के सत्यापन एवं छात्र सेवाओं से जुड़ी समस्याओं का एआई से समाधान करता है।
कोडक्लाउड के शशांक कृपाल ने बताया कि केवल एआई टूल और प्रॉम्प्टिंग की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को एआई आधारित तकनीकों पर व्यावहारिक रूप से काम करने और उन्हें विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए। ग्रेडस्मिथ के ईशान कपूर ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म हस्तलिखित, विषयपरक उत्तरों, आरेखों और समीकरणों वाली उत्तर पुस्तिकाओं का एआई के माध्यम से स्वचालित मूल्यांकन करता है। इसका चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में परीक्षण हुआ। इनफिनिटी इंफोवे के निकुंज गजेरा ने बताया कि यह समाधान विश्वविद्यालयों की मौजूदा ईआरपी और समर्थ पोर्टल जैसी व्यवस्थाओं के साथ एकीकृत होकर विभिन्न प्रक्रियाओं को एआई आधारित बनाने में मदद करता है। सुमेरू एजुटेक के चिंतन ओझा, सरस एआई के अमित कटारिया ने भी अपने नवाचार के बारे में बताया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी प्रस्तुतकर्ताओं से सवाल भी पूछे। नवाचार के पीछे का आइडिया और बजट को लेकर खासी बात की।
पोस्टिंग करने को घूस लेने में डिप्टी कलक्टर पर केस
हसनपुर (अमरोहा)। एसडीएम न्यायालय में अहलेमद फौजदारी लिपिक के पद पर तैनाती कराने का भरोसा देकर दो लाख रुपये लेने के आरोप में हसनपुर के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में डिप्टी कलक्टर गोरखपुर के पद पर तैनात सुदीप कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप है कि तैनाती नहीं होने पर रुपये वापस मांगे गए तो उन्हें टरका दिया गया। पुलिस ने अदालत के आदेश पर धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। नगर के मोहल्ला लालबाग निवासी मोहम्मद यूनुस वर्ष 2024 में तहसील में उर्दू अनुवादक एवं सहायक वासिल बाकी नवीस के पद पर तैनात थे। यूनुस का आरोप है कि तत्कालीन तहसीलदार सुदीप कुमार ने एसडीएम न्यायालय में अहलेमद फौजदारी लिपिक के पद पर उनकी तैनाती कराने का भरोसा दिया और इसके लिए दो लाख रुपये मांगे।
यूनुस के मुताबिक उन्होंने अपने परिचित कामिल सैफी के माध्यम से एक जनवरी 2024 को दो लाख रुपये तहसीलदार को भिजवा दिए।
यूनुस का कहना है कि काफी समय बीतने के बाद भी तैनाती नहीं हुई तो उन्होंने सुदीप कुमार से रुपये वापस मांगे। आरोप है कि उन्होंने 10-15 दिन और रुकने के लिए कहा। कामिल सैफी ने भी काम नहीं होने पर रुपये वापस करने के लिए कहा। इसी बीच सुदीप कुमार का तबादला डिप्टी कलक्टर गोरखपुर के पद पर हो गया। इसके बाद यूनुस ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर अदालत की शरण ली।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। कोतवाली प्रभारी राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि अदालत के आदेश पर डिप्टी कलक्टर गोरखपुर सुदीप कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
कोट :
मुझ पर लगाए गए आरोपी निराधार हैं। मैने पोस्टिंग के नाम पर किसी तरह का पैसा नहीं लिया है। जिसे उन्होंने पैसा दिया है, उससे इस बावत मालूमात करें।
सुदीप कुमार, डिप्टी कलक्टर गोरखपुर

