लखनऊ। प्रधानाचार्य पद पर लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने के बाद आयोग से नए प्रधानाचार्य के चयन पर उसी विद्यालय में शिक्षक बनकर काम करना सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाता है। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद की ओर से उठाई गई इस समस्या पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। डिप्टी सीएम ने शनिवार को गांधी भवन में प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेशीय सम्मेलन एवं शैक्षिक गोष्ठी में कहा कि प्रधानाचार्यों के सम्मान और गरिमा से जुड़े विषयों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पर शासन स्तर पर प्रयास करेंगे। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री से बात की जाएगी।
डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रधानाचार्य प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करने के साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार करते हैं। एमएलसी उमेश द्विवेदी, एमएलसी इंजी.अवनीश सिंह व एमएलसी श्रीचन्द शर्मा ने परिषद के मुद्दों को गंभीर और उचित बताते हुए इनके निराकरण का आश्वासन दिया।
अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा,शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने मदद का भरोसा दिया।
सरकार से मांगा समाधान
परिषद के संरक्षक डॉ. वीरेन्द्र प्रताप सिंह,महामंत्री डॉ. सुखपाल सिंह तोमर व प्रवक्ता डॉ. राघवेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने सरकार से समाधान मांगा।

