नई दिल्ली। स्वास्थ्य बीमा के मामलों में बड़ी संख्या में कंपनियां पॉलिसी से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन कर दावों को खारिज कर रही हैं। खासकर पॉलिसीधारकों को क्रॉनिक स्मोकर (लंबे समय से धूम्रपान का सेवन करने वाला) बताकर दावे खारिज किए जा रहे हैं। जबकि शिकायत के बाद जांच के दौरान बीमा कंपनियां यह साबित करने में असफल हो रही हैं कि पॉलिसीधारक लंबे समय से धूम्रपान का सेवन करता है।
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने स्पष्ट किया है कि बीमा कंपनियां केवल किसी आशंका या मौखिक जानकारी के आधार पर पॉलिसीधारक का दावा खारिज नहीं कर सकतीं। दावा खारिज करते समय बीमा कंपनी को स्पष्ट कारण बताना और संबंधित पॉलिसी की शर्त का उल्लेख करना जरूरी है।
कंपनी को दावे के खारिज या अस्वीकार किए जाने के आधार से जुड़े दस्तावेज और तथ्य भी उपलब्ध कराने होंगे। यदि दावा अस्वीकार किया जाता है तो बीमा कंपनी को लिखित रूप में कारण बताने के साथ संबंधित पॉलिसी की शर्त का हवाला देना होगा।
कारण और पॉलिसी की शर्त बतानी होगी
इरडा के स्वास्थ्य बीमा संबंधी नियमों के मुताबिक बीमा कंपनी को दावा स्वीकार या खारिज करने की प्रक्रिया पॉलिसी की शर्तों और लागू नियमों के अनुसार करनी होती है। यदि दावा खारिज या पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है तो कंपनी को खारिज करने का विशिष्ट कारण और संबंधित पॉलिसी की शर्त बतानी होती है। साथ ही पॉलिसीधारक को कंपनी और बीमा लोकपाल के शिकायत निवारण की जानकारी भी देनी होती है।
स्टार हेल्थ को 10.15 लाख देने का आदेश
हाल ही में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ा मामला सामने आया, जिसमें कोयंबटूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस को पॉलिसीधारक को करीब 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दावा चुकाने का आदेश दिया। मामला एनेरिज्म के इलाज से जुड़ा था। बीमा कंपनी ने दावा इस आधार पर खारिज किया था कि पॉलिसीधारक लंबे समय से धूम्रपान करता था। सुनवाई के दौरान पॉलिसीधारक की ओर से दलील दी गई कि कंपनी ने उसे क्रॉनिक स्मोकर बताते हुए दावा खारिज किया, लेकिन इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त ठोस प्रमाण पेश नहीं किए।
बिना ठोस रिकॉर्ड के दावे किए जा रहे खारिज
अन्य कंपनियां भी बड़ी संख्या में बीमा दावों को खारिज कर रही हैं। जिन बिंदुओं पर दावों को खारिज किया जा रहा है, उनसे जुड़े कोई ठोस साक्ष्य बीमा कंपनियां जांच में नहीं दे पा रही हैं। जैसे डॉक्टर का स्पष्ट लिखित दस्तावेज, मेडिकल जांच रिपोर्ट और पुरानी जांच रिपोर्ट, जिससे साबित होता हो कि पॉलिसीधारक लंबे समय से धूम्रपान करता है। जैसे हैदराबाद में एक कंपनी द्वारा 67 वर्षीय मरीज का दावा को उच्च रक्तचाप की जानकारी छिपाने के आधार पर खारिज कर दिया और पॉलिसी रद्द कर दी। जब मामले उपभोक्ता आयोग पहुंचा तो बीमा कंपनी उसके समर्थन में एक भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाई।
30 दिन में निपटारा हो
नियमों के अनुसार अंतिम जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद सामान्य तौर पर दावा 30 दिन के भीतर निपटाया जाना चाहिए। यदि मामले में जांच जरूरी है तो जांच जल्द शुरू कर अधिकतम 30 दिन में पूरी करनी होती है और ऐसे मामलों में दावा अंतिम जरूरी दस्तावेज मिलने के 45 दिन के भीतर निपटाया जाना है। हालांकि अधिकांश मामलों में बीमा कंपनियां दस्तावेज लेने के नाम पर दावे को निपटारा नहीं करतीं। बीमा कंपनियां 30 दिन की तिथि नजदीक आने पर पॉलिसीधारक को मेल कर नया दस्तावेज मांग लेती हैं। इसी तरह से महीनों तक दावों को लटकाए रखती हैं।
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