प्रयागराज, नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में 11508 शिक्षक भर्ती शुरू होने के साथ ही डीएलएड की सेमेस्टर परीक्षाओं में एक विषय में तीन-तीन बार फेल हो चुके और दो बार सेमेस्टर बैक अभ्यर्थी भी पुनर्परीक्षा में शामिल करने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन और हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों के पुनर्परीक्षा में शामिल करने के दबाव से परेशान सचिव राजेन्द्र प्रताप को सार्वजनिक सूचना जारी करनी पड़ी है। उन्होंने लिखा है कि एक विषय में तीन बार अनुत्तीर्ण या दो बार सेमेस्टर बैक अभ्यर्थियों का डीएलएड अभ्यर्थन समाप्त है। ऐसे अभ्यर्थियों को परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए कोई अवसर देय नहीं है। इसके लिए कार्यालय में संपर्क न करें।
हाईकोर्ट ने मंजूर की थी राज्य सरकार की अपील : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएलएड (बीटीसी) प्रशिक्षुओं को डिप्लोमा कोर्स पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त मौका देने संबंधी एकल पीठ के आदेश को 20 फरवरी 2026 को निरस्त कर दिया था। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया था कि एनसीटीई के नियमों के तहत निर्धारित तीन वर्ष की अधिकतम अवधि के बाद परीक्षा में बैठने का अतिरिक्त अवसर नहीं दिया जा सकता। एनसीटीई के नियम राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों पर बाध्यकारी हैं। डीएलएड पाठ्यक्रम दो वर्ष का है और इसे अधिकतम तीन वर्ष में पूरा करना अनिवार्य है।
एनसीटीई के नियम नहीं बदल सकता पीएनपी
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा था कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी को परीक्षा कराने और परिणाम घोषित करने का अधिकार है, लेकिन वह अपने कार्यकारी आदेश से एनसीटीई के वैधानिक नियमों में बदलाव नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि अवैध आदेश के आधार पर अन्य अभ्यर्थी समान लाभ का दावा नहीं कर सकते। जिन प्रशिक्षुओं को पहले अतिरिक्त अवसर दिया गया था, उससे दूसरे अभ्यर्थियों को स्वतः वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होता।

