12 September 2026

छह हजार दिव्यांग-महिला शिक्षकों को तबादले का इंतजार

 परिषदीय स्कूलों के छह हजार दिव्यांग, महिला व असाध्य रोगों से पीड़ित शिक्षकों को मनचाहे जिलों में स्थानांतरण का इंतजार है। जून में इनसे स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए गए थे, लेकिन अभी तक तबादला सूची जारी नहीं हुई है।



स्थानांतरण की प्रक्रिया

परिषदीय स्कूलों में पढ़ा रहे दिव्यांग, महिला व असाध्य रोग पीड़ित शिक्षकों के ही स्थानांतरण की प्रक्रिया इस बार शुरू की गई। बाकी सामान्य शिक्षकों को एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण का अवसर इस बार नहीं दिया गया। ऐसे में यह लगा कि जरूरतमंद शिक्षकों को इस बार आसानी से दूसरे जिले में स्थानांतरण की सुविधा मिल जाएगी। जून में स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए गए।


शिक्षकों की उम्मीदें

आवेदन करने वाले करीब छह हजार शिक्षकों को उम्मीद थी कि जल्द स्थानांतरण आदेश जारी होगा। छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार ही शिक्षकों को स्थानांतरित किया जाने की व्यवस्था की गई। पहले शिक्षकों में यह भ्रम फैला कि अगर पति-पत्नी में से किसी ने भी स्थानांतरण के लिए फॉर्म भरा तो दोनों में कम छात्र-शिक्षक अनुपात वाले जिले में पति या पत्नी में से किसी एक का स्थानांतरण कर दिया जाएगा। मामले ने तूल पकड़ा तो फिर यह स्पष्ट किया गया कि जो दंपत्ति शिक्षक स्थानांतरण का फॉर्म भरेगा सिर्फ उसी के тадादले पर विचार होगा।


स्थानीय शिक्षकों की स्थिति

उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव कहते हैं कि दिव्यांग-महिला व असाध्य रोगी शिक्षकों के बीच जिले में सरप्लस शिक्षकों को भी चिह्नित कर उन्हें जिले के भीतर एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय स्थानांतरित कर एकल व कम शिक्षक वाले स्कूलों में भेजा जा रहा है। अब यह प्रक्रिया भी खत्म हो रही है लेकिन इन शिक्षकों को अभी भी स्थानांतरण का इंतजार है। अब तबादला सत्र शून्य होने की कगार पर है。