माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से पत्र जारी कर मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से मृतक आश्रितों को नौकरी देने में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी जताई गई है। बीते 31 मई के बाद से मृतक आश्रितों की भर्ती के लिए आवेदन और उसके निस्तारण की समस्त प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से की जानी है। मानव संपदा पोर्टल पर मृतक आश्रित सेवायोजन प्रणाली शुरू की गई है, जिससे पारदर्शी ढंग से नियुक्ति की जा सके। नियुक्ति प्राधिकारी के माध्यम से प्राथमिक स्तर पर ऑनलाइन ही लॉगिन और पासवर्ड के माध्यम से मृतक आश्रित आवेदनों को अनुमोदित कर आगे बढ़ाया जाना है।
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ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से मृतक आश्रित नियुक्त के आवेदन, मृतक कर्मियों के अंतिम रिपोर्टिंग कार्यालय में भेजे जाएंगे। ऐसे में यह कार्य प्रत्येक संबंधित कार्यालय व निदेशायल के सभी ऑफिस एडमिन के माध्यम से अनिवार्य रूप से की जानी है। जिस ऑफिस एडमिन की ओर से यह कार्य नहीं किया जाएगा, उस कार्यालय के मृतक आश्रित आवेदन नहीं कर सकेंगे। 54 जिलों में प्रथम स्तर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में जल्द कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले 54 जिलों में लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अंबेडकर नगर, सुलतानपुर और बाराबंकी इत्यादि हैं।
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मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति हमेशा नियमित और स्थायी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मृतक आश्रित कोटे के तहत मिलने वाली सरकारी नियुक्तियों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधिक व्यवस्था दी थी। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया था कि अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नियुक्तियां हमेशा स्वीकृत पदों पर नियमित और स्थायी प्रकृति की होती हैं। इसलिए ऐसे नियुक्ति पत्रों में अस्थायी सेवा की शर्त जोड़ना कानूनी रूप से पूरी तरह अवैध और अनुचित है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने आगरा की रहने वाली सपना सारस्वत की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था। मामले में याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अमित सक्सेना ने पक्ष रखा था।
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