11 October 2026

ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी पर आरोप लगे तो FIR से पहले जांच जरूरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारी पर आरोप लगे तो FIR से पहले जांच जरूरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

प्रयागराज। ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ ड्यूटी के दौरान लगाए गए आरोपों के मामले में FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच आवश्यक है। मामले को मिनी ट्रायल में नहीं बदला जा सकता।

22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का आदेश रद्द

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने विशेष अदालत द्वारा 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश को रद्द कर दिया। मामला बलिया जिले के बांसडीह क्षेत्र की दो महिलाओं की शिकायत से जुड़ा था।

महिलाओं ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की, उन्हें शौचालय जाने से रोका और जातिसूचक टिप्पणियां कीं। शिकायत में उपनिरीक्षक राकेश कुमार यादव, आरक्षी अमित कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल थे।

महिलाओं का दावा था कि 12 जून को पुलिस अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

विशेष अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अगस्त को महाराजगंज की एससी-एसटी एक्ट से संबंधित विशेष अदालत ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। पुलिसकर्मियों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने आदेश को रद्द करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध ड्यूटी के दौरान लगाए गए आरोपों की प्रकृति और संबंधित कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

BNSS की धारा 173(4) और 175(3) पर टिप्पणी

अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) और 175(3) के संदर्भ में कहा कि शिकायत पर सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश देना हर मामले में स्वतः उचित नहीं है। मामले की परिस्थितियों के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया और आवश्यक जांच पर विचार करना जरूरी है।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाने और आवश्यक जांच करने के निर्देश दिए।

सरकारी कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह मामला सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध ड्यूटी के दौरान लगाए गए आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है। हालांकि, इस निर्णय का अर्थ यह नहीं है कि सरकारी कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज ही नहीं हो सकती। प्रत्येक मामले में लागू कानून, आरोपों की प्रकृति और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

नोट: यह समाचार उपलब्ध समाचार-कतरन के आधार पर तैयार किया गया है। फैसले की सटीक कानूनी व्याख्या के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मूल आदेश का अवलोकन करना उचित होगा।